उत्तराखंड में Land Monetisation पर विवाद, सरकार ने कहा चुनिंदा भूखंडों से बढ़ेगा राजस्व

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 05, 2026

देहरादून, चार नवंबर उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीनों को मनमाने ढंग से निजी हाथों में सौंपने के कांग्रेस के आरोपों पर राज्य सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि आर्थिक गतिविधियों के लिए सरकारी जमीन के कुछ ही भूखंड चिह्नित किए गए हैं और उनका उपयोग प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। राज्य सरकार पर बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने बुधवार को राज्यव्यापी अभियान भूमि बचाओ, धामी हटाओ शुरू किया, जिसके तहत वरिष्ठ पार्टी नेताओं के नेतृत्व में राज्य के अलग-अलग शहरों में विरोध मार्च निकाले गए। कांग्रेस ने मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन से जुड़े फैसले सहित इस प्रकार के अन्य फैसलों पर राज्य सरकार से पुनर्विचार करने की भी मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया में यह विचार प्रमुखता से आया कि राज्य की उपलब्ध सरकारी भूमि का योजनाबद्ध और उत्पादक तरीके से उपयोग किया जाए, ताकि नयी आर्थिक गतिविधियां विकसित हों, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों और सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो।’’ उन्होंने स्पष्ट किया कि इस उद्देश्य से सरकारी जमीन के कुछ चुनिंदा भूखंड चिह्नित किए गए हैं, जिनकी संख्या बहुत सीमित है और बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने की बात तथ्यों के अनुरूप नहीं है। प्रमुख सचिव ने बताया कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर लगभग छह-सात चयनित भूखंडों के लिए बोली प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने इस प्रक्रिया को राज्य में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक संभावनाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सुंदरम ने कहा कि राज्य में धार्मिक, प्राकृतिक, साहसिक, आरोग्य और अन्य पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं और ऐसे में यदि आतिथ्य के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निवेश आकर्षित किया जाता है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश के युवाओं, स्थानीय कारोबारियों, छोटे उद्यमियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलेगा। प्रमुख सचिव के अनुसार, आतिथ्य क्षेत्र में प्रस्तावित निवेश से लगभग 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि इससे जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से 10,000 से 15,000 और लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों से माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य माध्यमों से राज्य को हर महीने लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार यह पहल केवल भूमि के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, निवेश, स्थानीय व्यापार और राज्य की राजस्व क्षमता को बढ़ाने की एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।’’ प्रमुख सचिव ने कहा कि कई ऐसी जमीनों का जिक्र कर भ्रम पैदा किया जा रहा है, जिन्हें पहले ही प्रस्ताव से हटा दिया गया है और वे अब योजना का हिस्सा नहीं हैं। इस संबंध में उन्होंने चौबटिया के भूखंड का उदाहरण दिया और कहा कि व्यावहारिक नहीं पाए जाने के कारण इसे प्रस्ताव से हटा दिया गया था, जबकि धनोल्टी की जमीन वन भूमि होने के कारण उसे भी छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि एचएमटी की भूमि सिडकुल के पास है और यूआईआईडीबी की वर्तमान प्रक्रिया से उसका कोई संबंध नहीं है।

इसी प्रकार, ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की भूमि वन भूमि है जो अभी तक राज्य सरकार के किसी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुई है। प्रमुख सचिव ने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृहों के बारे में भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इनमें से कई परिसंपत्तियों के संबंध में न तो मंत्रिमंडल ने कभी मंजूरी दी है और न ही बोर्ड ने कोई अनुमोदन किया है। इसके बावजूद इन्हें प्रस्तावित योजनाओं का हिस्सा बताया जा रहा है।

प्रमुख खबरें

BCCI ने घोषित किया WPL 2027 शेड्यूल, मुंबई के CCI मैदान पर होगा फाइनल मुकाबला

US Midterm में Republican पार्टी की हार के लिए Iran युद्ध जिम्मेदार, बोले JD Vance

Virat Kohli ने तोड़ा Sachin Tendulkar का बड़ा रिकॉर्ड, ODI Chase में हासिल किया शीर्ष स्थान

Indira Gandhi Stadium के पास 5 नवंबर शाम Traffic Restrictions, दिल्ली पुलिस ने जारी की एडवाइजरी