By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 17, 2026
उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू द्वारा उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को शनिवार को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उनका जीवन एक ‘‘खुली किताब’’ है और वह आरोपों के संबंध में किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। साहू के खिलाफ जान से मारने की साजिश रचने, जातिसूचक टिप्पणी करने, मारपीट, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोपों में 15 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद मंत्री की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। आर्य ने कहा कि साहू द्वारा लगाए गए सभी आरोप ‘‘100 फीसदी निराधार हैं।’’ उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाले को ही उन्हें साबित करना होगा।
मैं समझती हूं कि सब कुछ पारदर्शी है और कुछ भी छिपा हुआ नहीं है। इसके बावजूद अगर किसी को कोई संदेह है, तो वह अपनी इच्छानुसार जांच करा सकता है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।” आर्य की यह प्रतिक्रिया साहू के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। साहू ने दावा किया था कि आर्य ने 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से किसी जांच एजेंसी के माध्यम से मामले की जांच कराने की मांग भी की थी।
हालांकि, साहू ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया। उन्होंने कहा था कि वह इस संबंध में विस्तार से जानकारी देंगे। पुलिस में दर्ज शिकायत साहू द्वारा वापस लेने की मांग किए जाने के बारे में आर्य ने कहा, “साहूजी कह रहे हैं कि शिकायत वापस ले लो, तो सारे आरोप खत्म हो जाएंगे।
लेकिन अगर मैं शिकायत वापस नहीं लूंगी, तो आरोप बने रहेंगे। इससे साफ है कि वह किस इरादे से यह सब कह रहे हैं।” आर्य ने साहू के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उनके वीडियो के साथ साझा की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से तैयार की गई है। उन्होंने कहा, “मैं अपने इष्टदेव गोलज्यू की कसम खाती हूं कि वह ऑडियो 100 फीसदी सच है।
उसमें कोई बनावट नहीं है, न ही उसका निर्माण कृत्रिम मेधा की मदद से किया गया है। उसमें किसी तरह की मिलावट नहीं है।” आर्य ने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2003 में उनके मायके वालों के सहयोग से हुई थी। उस समय वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थीं।
इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा और वह विधानसभा पहुंचने के बाद मंत्री बनीं। साहू ने अपने वीडियो में दावा किया था कि उन्होंने ‘‘सड़क पर खड़ी एक महिला को कहां से कहां पहुंचा दिया’’, लेकिन अब वह अपने पद के घमंड में सब कुछ भूल गई हैं। अपने पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसकी जानकारी देने के फैसले को भी आर्य ने सही ठहराया।
उन्होंने कहा कि महिला चाहे साधारण हो या किसी पद पर आसीन, यदि उसके साथ घरेलू हिंसा होती है तो उसे इसके खिलाफ निर्णय लेना चाहिए और अपनी आवाज उठानी चाहिए। आर्य ने कहा, “महिलाओं को अत्याचार सहना नहीं है, उसके खिलाफ बोलना है। तभी यह सब रुकेगा।” उन्होंने कहा कि वह अपने पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं और उन्हें भरोसा है कि उत्तराखंड पुलिस उनकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए उन्हें न्याय दिलाने के लिए पूरी मजबूती से काम करेगी।
आर्य ने अपनी पार्टी, विपक्षी दलों और आम लोगों से मिले समर्थन एवं सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।