वंदे मातरम् राष्ट्र के प्रति समर्पण और निष्ठा से भर देता है: भारती दीक्षित

By प्रेस विज्ञप्ति | May 23, 2026

इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर शनिवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, चांदनी चौक में ‘वंदे मातरम् गाथा’ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

भारती दीक्षित ने इसके लिखे जाने से लेकर बाद में वंदे मातरम् से संबंधित जो भी महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं– उन सबको समाहित कर किस्सागो रूप में प्रस्तुत किया। कैसे 1896 में कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में युवा कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के सुमधुर कंठ के गान ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा फिर से 1906 के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में गाया गया और इसे राष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली। बंगाल विभाजन के विरुद्ध यह जनता को एकीकृत करने का निमित्त बन गया। बंगाल से होते हुए 1907 में नागपुर और फिर 1907 में ही जर्मनी, फिर ब्रिटेन। अंग्रेज जितना ही इसे रोकने की कोशिश करते रहे, इस पर प्रतिबंध लगाते रहे, यह उतना ही प्रसिद्ध होता गया। 

भारती दीक्षित ने वंदे मातरम् के स्वतंत्रता संग्राम में महत्व से लेकर अब तक के इसके सफर को ओजपूर्ण भाव के साथ प्रस्तुत किया। दर्शक-श्रोता भाव में डूबे हुए सुनते रहे, समय का जैसे लोप हो गया था। 50 मिनट की प्रस्तुति ने लोगों को अपने में बांधे रखा। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने स्वागत वक्तव्य में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने वंदे मातरम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि रावण पर विजय के पश्चात् जब विभीषण ने भगवान श्रीरामचंद्र से श्रीलंका में ही कुछ दिन रुकने का आग्रह किया तब उन्होंने कहा, 'जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है और मुझे अपनी जन्मभूमि की याद आ रही है इसलिए मुझे जाना होगा। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भले ही वंदे मातरम् गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा है, लेकिन वंदे मातरम का भाव अथर्ववेद में  "माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः" के रूप में सदियों से विद्यमान है। 

मंच का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया। परिषद् गीत सुनीता बुग्गा ने प्रस्तुत किया। आरके पुरम विभाग अध्यक्ष मलखान सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. राष्ट्रीय मंत्री नीलम राठी, केंद्रीय कार्यालय मंत्री संजीव सिन्हा, साहित्य परिक्रमा प्रबंधक रजनी मान, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के संयुक्त महामंत्री बृजेश गर्ग, कोषाध्यक्ष, अक्षय अग्रवाल, दक्षिणी विभाग अध्यक्ष सारिका कालरा, जयसिंह आर्य, जगदीश सिंह, नीलम भागी, नवीन नीरज, मुन्ना रजक, प्रशांत सिंह सहित अनेक साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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