वरदा चतुर्थी पर पाएं Lord Ganesha की कृपा, इस Special Puja Vidhi से दूर होंगे जीवन के सारे विघ्न

By दिव्यांशी भदौरिया | May 20, 2026

आज यानी 20 मई, बुधवार को वरदा चतुर्थी मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर वरदा चतुर्थी मनाई जाती है। वरदा चतुर्थी के दिन श्री गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। आइए आपको इस लेख में वरदा चतुर्थी की पूजा विधि मंत्र और आरती बताते हैं, जिससे आपकी पूजा सफल हो जाए और किसी भी तरह की कोई बाधा न आए।

- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके और साफ वस्त्र पहनें।

 - अब घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें और इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं।

 - चौकी पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और साथ ही मंगल कलश रखें।

 - इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण (पंचामृत) से स्नान कराएं, फिर साफ जल से स्नान कराएं।

 - अब बप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन का तिलक, धूप-दीप और फूल अर्पित करें।

 - भगवान गणेश जी की सबसे प्रिय दूर्वा (दूब घास) जरुर अर्पित करें।

 - गणेश जी को मोदक और गुड़ का भोग लगाएं।

 - इसके बाद गणपति मंत्रों का जप करें और पूरी श्रद्धा भाव के साथ उनकी आरती गाएं।

 - आखिर में सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें।

वरदा चतुर्थी शुभ मुहूर्त

माना जाता है कि चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक या अपयश का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तिथि पर चंद्रमा देखने से बचें। वरदा चतुर्थी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार है-

-चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 10 बजकर 56 मिनट से सुबह 11 बजकर 6 मिनट तक

-एक दिन पूर्व, वर्जित चंद्र दर्शन का समय - दोपहर 2 बजकर 18 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक (19 मई)

-वर्जित चंद्र दर्शन का समय - सुबह 8 बजकर 43 मिनट से सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

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