विद्या और बुद्धि की देवी की पूजा का पर्व ‘वसंत पंचमी’

By योगेश कुमार गोयल | Feb 15, 2021

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी ‘वसंत पंचमी’ के रूप में देशभर में धूमधाम से मनाई जाती रही है। माना जाता है कि यह दिन वसंत ऋतु के आगमन का सूचक है। शरद ऋतु की विदाई और वसंत के आगमन के साथ समस्त प्राणीजगत में नवजीवन एवं नवचेतना का संचार होता है। वातावरण में चहुं ओर मादकता का संचार होने लगता है। प्रकृति के सौंदर्य में निखार आने लगता है। शरद ऋतु में वृक्षों के पुराने पत्ते सूखकर झड़ जाते हैं, लेकिन वसंत की शुरुआत के साथ ही पेड़-पौधों पर नयी कोंपलें फूटने लगती हैं। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिल जाते हैं, धरती का वातावरण महकने लगता है। वसंत पंचमी के ही दिन होली का उत्सव भी आरंभ हो जाता है और इस दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है।

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ऐसी मान्यता है कि इसी दिन विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती अपने हाथों में वीणा, पुस्तक व माला लिए अवतरित हुईं थी। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में इस दिन लोग विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती की पूजा-आराधना करके अपने जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करने की कामना करते हैं। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने वसंत पंचमी के दिन ही प्रथम बार देवी सरस्वती की आराधना की थी और कहा था कि अब से प्रतिवर्ष वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की पूजा होगी और इस दिन को मां सरस्वती के आराधना पर्व के रूप में मनाया जाएगा।

प्राचीन काल में वसंत पंचमी को प्रेम के प्रतीक पर्व के रूप में ‘वसंतोत्सव’, ‘मदनोत्सव’, ‘कामोत्सव’ अथवा ‘कामदेव पर्व’ के रूप में मनाए जाने का भी उल्लेख मिलता है। इस संबंध में मान्यता है कि इसी दिन कामदेव और रति ने पहली बार मानव हृदय में प्रेम की भावना का संचार कर उन्हें चेतना प्रदान की थी, ताकि वे सौन्दर्य और प्रेम की भावनाओं को गहराई से समझ सकें। इस दिन रति पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि कामदेव ने वसंत ऋतु में ही पुष्प बाण चलाकर समाधिस्थ भगवान शिव का तप भंग करने का अपराध किया था, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया था। बाद में कामदेव की पत्नी रति की प्रार्थना और विलाप से द्रवित होकर भगवान शिव ने रति को आशीर्वाद दिया कि उसे श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में अपना पति पुनः प्राप्त होगा।

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‘वसंत पंचमी’ को गंगा का अवतरण दिवस भी माना जाता है। इसलिए धार्मिक दृष्टि से वसंत पंचमी के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्व माना गया है। वसंत पंचमी को ‘श्री पंचमी’ भी कहा गया है। कहा जाता है कि इस दिन का स्वास्थ्य वर्षभर के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। अतः इस पर्व को स्वास्थ्यवर्धक एवं पापनाशक भी माना गया है।

- योगेश कुमार गोयल 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा कई पुस्तकों के रचयिता हैं। इनकी गत वर्ष भी ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ तथा ‘जीव जंतुओं का अनोखा संसार’ पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।)

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