Vinayak Damodar Savarkar Birth Anniversary: हिंदुत्व के जनक और 'Hindu Rashtra' के प्रखर समर्थक थे वीर सावरकर

By अनन्या मिश्रा | May 28, 2026

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के महान क्रांतिकारी वीर सावरकर का 28 मई को जन्म हुआ था। वीर सावरकर को समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, लेखक और राजनीतिक विचारक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया है। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा नासिक के सरकारी स्कूल में हुई थी। वह एक बुद्धिमान व्यक्ति थे। उन्होंने बचपन में ही गीता का श्लोक कंठस्थ कर लिया था। उस समय महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक का समाचार पत्र 'केसरी' छपता था। सावरकर इसी अखबार को पढ़ते थे और उनके मन में क्रांतिकारी विचार आने लगे। बाद में वीर सावरकर ने 'मित्र मेला' नामक संगठन बनाया। जिसने भारत की पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रभावित किया था।

मित्र मेला संगठन

बता दें कि मित्र मेला संगठन के सदस्यों ने नासिक में प्लेग से पीड़ित लोगों की सहायता की थी। वह में मित्र मेला को 'अभिनव भारत' कहा गया और 'भारत को आजाद होना चाहिए' घोषित किया गया। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि देश में अस्पृश्यता के खिलाफ सबसे शक्तिशाली सामाजिक सुधार आंदोलन की शुरूआत वीर सावरकर ने की थी। वीर सावरकर एक बहुआयामी व्यक्ति थे।

गांधी के आलोचक

वीर सावरकर को महात्मा गांधी का आलोचक कहा जाता है। वह महात्मा गांधी को 'पाखंडी' कहते थे। साल 1948 में गांधी की हत्या के दौरान वीर सावरकर को सह-साजिशकर्ता के रूप में आरोपित किया गया। सावरकर की गिरफ्तारी हुई, लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण उनको अदालत द्वारा रिहा कर दिया गया।

हिंदू राष्ट्र के रूप में सावरकर ने भारत के आदर्श का समर्थन किया था। उन्होंने कई पोस्टल भी लिखीं, जिनमें 'जोसेफ माजिनी- जीवनी और राजनीति' पुस्तक काफी प्रसिद्ध हुई। उन्होंने न सिर्फ अंग्रेजों द्वारा लाई गई वस्तुओं का विरोध किया था बल्कि विदेशों से आने वाली चीजों का भी विरोध किया था।

वहीं साल 1911 में सावरकर को काला पानी की सबसे ज्यादा कठिन सजा सुनाई गई थी। दरअसल, सावरकर ने नासिक जिले के कलेक्टर जैक्सन की हत्याकर दी थी। नासिक षड्यंत्र कांड के तहत वीर सावरकर को 07 अप्रैल 1911 में यह सजा सुनाई गई थी। इस दौरान वह 04 अप्रैल से लेकर 21 मई 1921 तक पोर्ट ब्लेयर में रहे।

मृत्यु

वहीं 26 फरवरी 1966 को वीर सावरकर का निधन हो गया था।

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