By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 25, 2026
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सऊदी अरब में फंसे कश्मीरी तीर्थयात्रियों के मामले में उनकी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया और पूछा कि उन्होंने उन तीर्थयात्रियों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। विहिप की ये टिप्पणियां यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह मुद्दा उठाया।
बंसल ने कहा, ‘‘कृपया हमें बताएं कि यमन के हूती आतंकवादियों के हमलों के बाद पिछले 15 दिनों से जेद्दा में फंसे 34 कश्मीरी तीर्थयात्रियों की सुध कौन लेगा।’’ उन्होंने फारूक और उमर अब्दुल्ला से तीर्थयात्रियों की वापसी में मदद के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा। उन्होंने सवाल किया कि दोनों नेताओं ने सऊदी अधिकारियों को पत्र क्यों नहीं लिखा और हूती विद्रोहियों से अपील क्यों नहीं की। उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान की तारीफों के पुल बांधने वाले फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को बताना चाहिए कि इन तीर्थयात्रियों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अब तक क्या किया है।
उन्होंने सऊदी अरब को पत्र क्यों नहीं लिखा? उन्होंने हूती विद्रोहियों से अपील क्यों नहीं की?’’ बंसल ने हूती हमलों को लेकर गाजा के समर्थन में नारे लगाने वालों की कथित चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दोनों नेताओं को तीर्थयात्रियों की वापसी सुनिश्चित करने में मदद के लिए पाकिस्तान और हूती विद्रोहियों से संपर्क करने की चुनौती भी दी।
उन्होंने कहा, ‘‘अपने दोस्त पाकिस्तान और अपने प्रिय हूती दोस्तों से बात कीजिए। यकीनन, दोनों आपके समुदाय की अपील सुनेंगे और उन्हें सुरक्षित लौटने देंगे! क्या आप ऐसा करने का साहस रखते हैं?’’ उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताया था और कहा था कि उड़ानें रद्द होने तथा हवाई किराये में भारी बढ़ोतरी के कारण कई राज्यों के तीर्थयात्री और अन्य यात्री सऊदी अरब में फंसे हुए हैं।
उन्होंने कहा था, ‘‘यह एक मुद्दा है और गंभीर चिंता का विषय है। वहां केवल हमारे तीर्थयात्री ही नहीं फंसे हैं, बल्कि उड़ानें रद्द होने के कारण देश के विभिन्न राज्यों के लोग भी सऊदी अरब में फंसे हुए हैं।” अब्दुल्ला ने कहा था कि उनकी सरकार समाधान तलाशने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क करेगी और यदि केंद्र सरकार टिकटों या यात्रियों की स्वदेश वापसी के लिए वित्तीय सहायता नहीं दे पाती है, तो उनकी सरकार अपने बजट से धनराशि की व्यवस्था करेगी।