Vibhuvan Sankashti Chaturthi: 3 साल में एक बार आई Vibhuvan Sankashti Chaturthi, जानें Lord Ganesha की Puja Vidhi और मुहूर्त

By अनन्या मिश्रा | Jun 03, 2026

आज यानी की 03 जून 2026 को विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बप्पा को सुख-समृद्धि के दाता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। बता दें कि 3 साल में एक बार आने वाली इस तिथि को बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। वैसे तो हर महीने संकष्टी चतुर्थी पर गणपति बप्पा की पूजा होती है। लेकिन अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको विभुवन संकष्टी चतुर्थी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर बप्पा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। अब पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। अब चौकी पर बप्पा की प्रतिमा को स्थापित करें। गंगाजल से छिड़काव करें और पंचामृत से बप्पा का अभिषेक करें। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा, सिंदूर, लाल पुष्प, पान और अक्षत आदि अर्पित करें। बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।

महत्व

अधिक मास में पड़ने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत किया जाता है और गणपति बप्पा की पूजा आराधना की जाती है। भक्त इस दिन परिवार की सुख-समृद्धि की करते हैं। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। ऐसे में बुधवार को पड़ने वाली यह संकष्टी चतुर्थी को खास माना जाता है।

पूजा और चंद्र अर्घ्य

दिन भर व्रत करने के बाद शाम को भगवान गणेश की पूजा करें। फिर विभुवन संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें और गणेश जी की आरती करें। चंद्रोदय होने के बाद तांबे या चांदी के पात्र में दूध, जल, अक्षत और फूल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। फिर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करें।

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