By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के काम करने के तरीके और उनके असर दिखाने में लगने वाले समय को समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत किया जाना चाहिए, क्योंकि साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि होने से मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर अधिक स्वीकार्यता मिलेगी। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) द्वारा आयोजित ‘कौमारकोन 2026’ (कौमारभृत्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन) को संबोधित करते हुए, उन्होंने छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं से आग्रह किया कि वे आयुर्वेदिक उपचारों की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से उनकी प्रभावशीलता को प्रमाणित करने में गहरी रुचि लें। कौमारभृत्य आयुर्वेद की एक विशिष्ट शाखा है, जो बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर केंद्रित है।
आपको किसी खास विषय में विशेष रुचि लेनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि वह कैसे काम करता है।’’ उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से साबित करना जरूरी है कि इसकी दवाएं कैसे काम करती हैं और असर दिखाने में कितना समय लेती हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘अगर ये दो बातें पक्की हो जाएं, तो फिर किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है। इससे मरीज़ का आत्मविश्वास बढ़ेगा।’’ पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को लिखित दस्तावेजों में दर्ज करने के प्रयासों के लिए आयुष मंत्रालय को बधाई दी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐतिहासिक रूप से, इस ज्ञान का एक बड़ा हिस्सा मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जाता रहा है। राधाकृष्णन ने भरोसा जताया कि मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण और मरीजों का बढ़ता विश्वास, आयुर्वेदिक इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि कर सकता है। चिकित्सा छात्रों के बीच आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि उन्हें आयुर्वेदिक उपचार और दवाओं में भरोसा पैदा करना चाहिए, तथा साथ ही अनुसंधान के जरिए यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि ये कैसे काम करती हैं।
वैज्ञानिक सटीकता और मरीज-केंद्रित देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि आयुर्वेद निवारक स्वास्थ्य देखभाल और जीवनशैली प्रबंधन में सहायक हो सकता है, जबकि आधुनिक चिकित्सा निदान, आपातकालीन स्थितियों, सर्जरी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘इनके ज़िम्मेदार एकीकरण का आधार साक्ष्य, सुरक्षा, गुणवत्ता और स्थापित चिकित्सीय मानकों के प्रति सम्मान होना चाहिए।’’