By अंकित सिंह | Jul 06, 2024
तीन नए आपराधिक कानूनों पर पी चिदंबरम की तीखी टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री के बयान को 'अक्षम्य' करार दिया और मांग की कि पूर्व केंद्रीय मंत्री को अपना 'अपमानजनक और बदनाम करने वाला बयान वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सुबह मैंने एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक को दिए गए चिदम्बरम के साक्षात्कार को पढ़ा तो मैं शब्दों से परे चौंक गया, जिसमें उन्होंने कहा कि नए कानूनों का मसौदा अंशकालिक लोगों द्वारा तैयार किया गया था। क्या हम संसद में पार्ट टाइमर हैं? यह संसद के विवेक का अक्षम्य अपमान है।
पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि दीर्घावधि में, तीन कानूनों को संविधान और आपराधिक न्यायशास्त्र के आधुनिक सिद्धांतों के अनुरूप लाने के लिए उनमें और बदलाव किए जाने चाहिए। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ब्रिटिश काल के क्रमश: भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान ले लिया है।
चिदंबरम ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘तथाकथित नए कानूनों का 90-99 फीसदी अंश कांट-छांट करने, नकल करने और इधर से उधर चिपकाने का काम है। यह काम मौजूदा तीन कानूनों में कुछ बदलाव करके किया जा सकता था लेकिन यह व्यर्थ कवायद बना दी गयी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हां, नए कानूनों में कुछ सुधार किए गए हैं और हम उनका स्वागत करते हैं। उन्हें संशोधन के रूप में पेश किया जा सकता था। दूसरी ओर, कई प्रतिगामी प्रावधान भी है। कुछ बदलाव प्रथम दृष्टया असंवैधानिक हैं।’’