हिंदी दिवस पर बोले वेंकैया नायडू, न कोई भाषा थोपी जानी चाहिए और न ही किसी भाषा का विरोध होना चाहिए

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 14, 2020

नयी दिल्ली। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को कहा कि कोई भी संस्कारों की तरह शुद्ध और आस्थाओं की तरह पवित्र होती है इसलिए न कोई थोपी जानी चाहिए और न ही किसी का कोई विरोध होना चाहिए। हिन्दी दिवस के अवसर पर मधुबन एजुकेशनल बुक्स द्वारा आयोजित समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपनी भाषाई विविधता पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषाएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं और उनका समृद्ध साहित्यिक इतिहास रहा है। ज्ञात हो कि आज ही के दिन 1949 में संविधान सभा ने हिन्दी को राजके रूप में स्वीकार किया था। 

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उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा सुझाया मार्ग ही हमारी भाषाई एकता को सुदृढ़ कर सकता है। हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं को सीखना आसान होगा क्योंकि राष्ट्र के संस्कार, विचार तो समान ही हैं।’’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं का विकास साथ ही हो सकता है। ‘‘हम अन्य भारतीय भाषाओं के कुछ न कुछ मुहावरे, शब्द या गिनती जरूर सीखें।’’ उन्होंने सलाह दी कि हिन्दी में भी छात्रों को अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य और प्रख्यात साहित्यकारों से परिचित कराया जाए तथा हिंदी के साहित्यकारों, उनकी कृतियों से अन्य भाषाई क्षेत्रों को परिचित कराया जाए।

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