यारों से हुआ प्यार ब्रेकअप के बाद भी खत्म नहीं होता, ऐसी दोस्ती की मिसाल देती है विद्युत जामवाल की 'यारा'

By रेनू तिवारी | Aug 04, 2020

अभी तक आपने बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों में समाज के शरीफ लोगों को दोस्ती निभाते हुए देखा होगा। बदमाशों में भी दिल होता है इसके बारे में बॉलीवुड की फिल्मों में कम दिखाया गया है। जी5 पर रिलीज हुई विद्युत जामवाल, अमित साध, विजय वर्मा, संजय मिश्रा, केनी बसुमतारी की फिल्म यारा (YAARA) में  आप बदमाश टाइप सच्चे दोस्तों की जिंदगी की शानदार कहानी देखेंगे। फिल्म में एक्शन, इमोशन, धोखा -फरेबी, प्यार-दर्द, हंसना-रोना सबकुछ दिखाया गया है। यहां तक की नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर भी बात की गयी है। फिल्म यारा की कहानी इन्हीं चार दोस्तों के इर्द गिर्द बुनी गयी है। फिल्म का निर्देशन मशहूर डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया ने किया है। 

फिल्म की शुरूआत होती है राजस्थान के रेगिस्तान से जहां एक पिता अपने बेटे का मुंडन करवाने आया होता है ये समय आजादी के बाद का है यानी की 1947 के बाद का। मुंडन करवाते हुए आदमी को पता चलता है कि उसका दोस्त पाकिस्तान में फंस गया है उसके बेटी की जिम्मेदार निभानी होगी। आदमी एक साथ दोनों बच्चों (फागुन और मितवा) का मुंडन करवाकर उसे अपना मान लेता है। यहीं से शुरू होती है पहले दो यारों की दोस्ती। छोटी सी उम्र में राजस्थान में एक कांड के बाद  फागुन (विद्युत जामवाल) मितवा (अमित साध) वहां से भाग आते हैं। बच्चों की सफर के दौरान मुलाकात होती है चाचा (संजय मिश्रा) से। चाचा फागुन और मितवा को अपने गैंग सें शामिल कर लेता है। इस गैंग में दो बच्चे और होते है रिजवान (विजय वर्मा) और बहादुर (केनी बसुमतारी)। यहीं से बनता है फागुन, मितवा, रिजवान और बहादुर का चौकड़ी गैंग। ये गैंग नशीली ड्रग्स, हथियार , शराब का एक देश से दूसरे देश में गैर कानूनी धंधा करते है। चारों का चौकड़ी गैंग बदमाशों में काफी मशहूर गैंग होता है। चारों की बॉडिंग शानदार है। ये सभी एक दूसरे की टांग खिचते है, मिलकर काम करते है एक दूसरे को प्यार भी बहुत करते हैं। 

चौकड़ी गैंग को एक दिन चाचा के साथ बिहार का बैक लूटने का काम दिया जाता है। बैंक लूटने के दौरान चाचा की मौत हो जाती है। चौकड़ी गैंग के चारों यार केवल चाचा के लिए ही काम करते थे। चाचा की मौत के बाद पुरानी रंजिश के चलते चौकड़ी गैंग के चारों यार अपने सरदारों को मार देते हैं फिर अपने नये सफर पर निकल लेते हैं। इस सफर पर वह गरीबों को लूट-पाट करके मदद करते है, नक्सलियों को को हथियार भी बेचते हैं। इस दौरान फागुन को लाल सलाम वाले गैंग की स्टूटेंट (श्रुति हसन) से प्यार हो जाता है। बस यहीं प्यार आगे चौपड़ी गैंग के बर्बादी का कारण बनता है आखिरे कैसे ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

फिल्म का डायरेक्शन, कलाकार और कहानी

फिल्म का डायरेक्शन तिग्मांशु धूलिया ने किया है। फ्रांस की फिल्म लेस ल्योन्नेस (ए गैंग स्टोरी) के इस आधिकारिक रूपांतरण में तिग्मांशु धूलिया ने कॉकटेल क्राइम ड्रामा की उस श्रेणी पर मास्टरी कर ली है जिसकी पहली कोशिश में वह पांच साल पहले फिल्म 'बुलेट राजा' में फेल हो गए थे। उसी अंदाज से फिर वे मैदान में उतरे हैं। इस बार भी वह देश की सीमाओं के साथ खेलते नजर आये हैं। तिग्मांशु का डायरेक्शन तो बढ़िया है लेकिन फिल्म की कहानी बीच में जाकर टूटती नजर आती है। फिल्म में अचानक एक बड़ा सा बदलाव आ जाता है जो दर्शक को आसानी से हजम नहीं होता। ऐसा लगता है मानों  पर्दे पर यारों की केमिस्ट्री में खोए दर्शकों को झटके से उठा दिया गया हो। क्लाईमेक्स को भी सस्पेंस के चक्कर में काफी उलझाया गया है और फिल्म का एंड आपका दिल तोड़ देगा। 

एक्टिंग 

बात करें कलाकारों की तो भले ही फिल्म में कमियां है लेकिन इन कमियों पर फिल्म की कास्ट भारी पड़ गयी है। पर्दे पर शानदार एक्शन करने वाले विद्युत जामवाल की एक्टिंग में आप खो जाएंगे। जिस तरह वह अपने नाम फागुन का परिचय देते है वह काफी मजेदार है। विद्युत जामवाल की मैच्योर एक्टिंग, शानदार पर्सनेलिटी और जानदार एक्शन उन्हें परफेक्ट स्टार बनाता है। श्रुति हसन ने बाकी फिल्मों की तरह इसमें भी कुछ नहीं किया है। कमल हसन की बेटी होने के बाद भी उन्हें एक्टिंग का 'ए' भी नहीं आता। विद्युत  के साथ उनकी केमिस्ट्री भी कुछ खास नहीं जमी। विद्युत जामवाल के बाद फिल्म के असली खिलाड़ी है अमित साध, विजय वर्मा, संजय मिश्रा, केनी बसुमतारी। जहां एक तरह दौगले चेहरे वाला किरदार अमित साध ने बखूबी निभाया है वहीं दोस्ती में अपने कॉमेडी वाले डायलॉग से विजय वर्मा दर्शकों को हंसाते हैं। विजय वर्मा जहां एक तरह लोगों को हंसाते हैं वही दोस्त के चले जाने से जो दर्द होता है उसे भी आप उनके चेहरे पर देखते रह जाएगे। सभी संजय  मिश्रा को पर्दे पर देखने की और इच्छा होती है लेकिन उनका रोल काफी कम है जितने भी देर के लिए वह पर्दे पर आते हैं दिल जीत लेते हैं। 

 

फिल्म: यारा (Yaara)

कलाकार: विद्युत जामवाल, श्रुति हसन, अमित साध, विजय वर्मा, संजय मिश्रा, केनी बसुमतारी आदि।

निर्देशक: तिग्मांशु धूलिया

ओटीटी: ZEE5

रेटिंग:  ***

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