By अंकित सिंह | Oct 20, 2026
विजयादशमी के अवसर पर पूरे देश में धूम है। पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक, हर जगह विजयादशमी के त्यौहार को धूमधाम से मनाया जा रहा है। पटना, मुंबई, हिसार, चंडीगढ़, दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या, भोपाल, नागपुर जैसे शहरों में रावण दहन किया जा रहा है। दिल्ली में भी भव्य तरीके से अलग-अलग जगह पर दशहरे का कार्यक्रम रखा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारका पहुंची हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली में दशहरा महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। ऊधर नवरात्रि के दौरान 4 लाख से ज्यादा भक्तों ने कटरा में माता वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन किए।
मोदी ने कहा कि इस देश ने, इसकी संस्कृति ने और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है। ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षस राज रावण का अंत किया था। ये आस्था इसलिए भी है क्योंकि प्रभु राम ने हमें ऐसे आदर्श दिए जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय है।जो आज भी सुशासन का मानदंड माना जाता है। रामराज्य अर्थात् ऐसा शासन, जहाँ किसी के प्रति भेदभाव न हो, जहाँ सभी को न्याय मिले, जहाँ समान अवसर प्राप्त हों और जहाँ सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण हो... यही प्रभु श्रीराम का आदर्श है। इसलिए हमें हमेशा जनता को जनार्दन मानकर नागरिक देवो भव: के मंत्र पर आगे बढ़ना है। हमें गरीब, वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है।
मोदी ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी कठिन क्यों न हो... हमें दूसरों के भरोसे नहीं बैठना है। हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है।हमें संसाधनों पर विश्वास करना है। अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है। क्योंकि प्रभु श्रीराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकती। समुद्र सामने था, लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था, इसलिए रामजी ने जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया, जनभागीदारी को अपना संबल बनाया और असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया। यही सफलता का मूलमंत्र है।
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजयादशमी की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और सभी से अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के उदात्त आदर्शों को बनाए रखने तथा समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने एक संदेश में कहा, ‘‘विजयादशमी के पर्व का विशेष महत्व है। यह भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम को धर्मपरायणता और नैतिक आचरण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व अधर्म और अन्याय पर धर्म और न्याय की जीत का उत्सव है।’’ राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारतीय संस्कृति नैतिकता और कर्तव्य के आदर्शों पर आधारित है। उन्होंने कहा, ‘‘इस अवसर पर आइए, हम अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के उदात्त आदर्शों को बनाए रखने तथा समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लें।’’
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि विजयादशमी महज एक त्योहार नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि अन्याय, अत्याचार और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अपने संदेश में कहा कि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और सत्य की विजय का उत्सव मनाने के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता के मूल्यों और ‘‘विविधता में एकता’’ की भावना को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पर्व समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करेगा तथा नागरिकों को एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने की प्रेरणा देगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कामना की कि यह त्योहार सभी के जीवन को सुख, समृद्धि और सफलता से परिपूर्ण करे। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं। उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है। यह त्योहार भगवान राम द्वारा दशानन रावण का वध किए जाने की खुशी में मनाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। देशभर में यह त्योहार मनाया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग रावण के पुतलों का दहन देखने के लिए निकलते हैं। इसके साथ ही अनुष्ठानों, गीतों, नृत्य और शोभायात्राओं से भरपूर 10 दिवसीय उत्सव का समापन होता है।