पुलिस-क्राइम-पॉलिटिक्स के सहारे गैंगस्टर बने विकास दुबे का ऐसा अंत होना ही था

By सुरेश हिंदुस्थानी | Jul 10, 2020

कहा जाता है जब पाप का घड़ा फूटता है, तब अपने भी पराए हो जाते हैं। और उसका अंत स्वतः ही नजदीक आ जाता है। कुख्यात अपराधी विकास दुबे के मामले में उक्त कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती दिखाई देती है। विकास दुबे के पापों का घड़ा फूट चुका था। कहा जा रहा है कि जिस वाहन में एसटीएफ विकास को लेकर जा रहे थे, वह दुर्घटना ग्रस्त हुआ और विकास ने भागने का प्रयास किया और मुठभेड़ में मारा गया। वास्तविकता यह है कि हर अपराध की सजा जरूर मिलती है।

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राजनीति को अपराध मुक्त करने के लिए समय-समय पर आवाज मुखरित होती रही है। यह लोकतंत्र को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ही आवश्यक है। कहा जाता है कि अगर राजनीति अपराधियों के चंगुल में आ गई तो फिर राजनीति का स्वरूप कैसा होगा, यह हम समझ सकते हैं। हमने फिल्मों में भी देखा होगा कि हर बड़ा राजनेता कोई न कोई बड़ा आपराधिक कृत्य करता ही है। इसमें उसका राजनीतिक कद उसको सुरक्षित करने का ही काम करता है। किसी के मकान पर कब्जा करना, किसी की जमीन हथियाना, यह सब ऐसे ही आपराधिक प्रवृत्ति वाले राजनेताओं का काम है। विकास दुबे को हम अगर आपराधिक प्रवृत्ति का राजनेता लिखें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

पांच लाख के इनामी अपराधी विकास के बारे में यह तो पहले दिन से ही तय हो चुका था कि वह इधर उधर कितना भी भाग ले, लेकिन उसके बचने के सारे रास्ते बंद हो चुके थे। कानपुर में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में विकास दुबे की ओर से पुलिस दल पर कहर बनकर टूटे उसके समर्थक विकास की बड़ी ताकत थे, पुलिस ने योजना पूर्वक विकास की इस ताकत को नेस्तनाबूद किया। अभी हाल ही में विकास के एक साथी अमर दुबे को ढेर किया जाना, विकास के लिए एक गहरा धक्का ही था। विकास के सभी साथी अब खुफिया तंत्र के राडार पर हैं और जहां से विकास की मुखबिरी की जाती थी, वह भी लगभग समाप्त हो चुका है। इसलिए कहा जा सकता है कि विकास इस समय बिल्कुल अकेला पड़ गया था, ऐसे में विकास का बचना नामुमकिन ही था। मुठभेड़ में विकास के मारे जाने के बाद यह सवाल भी खड़ा होने लगा है कि विकास एक योजना के तहत ही पुलिस की पकड़ में आया और मुठभेड़ की कहानी भी उसी तरह रची गई होगी। क्योंकि अब विकास भी रहता तो क्या करता।

खूंखार अपराधी विकास दुबे के मकान की अभेद्य सुरक्षा को देखकर यही कहा जा सकता है कि विकास अपने आपको एक आतंकवादी सरगना की तरह ही सुरक्षित रखता था। हर तरफ की गतिविधि को एक कमरे से बैठकर देखा जा सकता था, यहां तक कि मुठभेड़ वाले दिन विकास की पत्नी ऋचा दुबे पूरी मुठभेड़ को लाइव देख रही थी। पूरा मकान किसी किले की दीवारों की भांति सुरक्षित था। जिसे मुठभेड़ के बाद नेस्तनाबूद कर दिया। वहां से कई चौंकाने वाली जानकारी पुलिस के हाथ लगीं। पूरा मकान किसी बड़े आतंकी की सुरक्षित पनाहगार की तरह ही था। पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने कहा भी था कि विकास के साथ आतंकियों जैसा बर्ताव किया जाएगा।

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अपराध और राजनीति का बेखौफ संगम इस प्रकार की परिणति को प्राप्त होगा, यह कोई नया नहीं है। कोई अपराधी फंसता है तो स्वाभाविक रूप से उसके राजनीतिक आका भी उसे अकेला छोड़ देते हैं। शायद विकास के साथ भी ऐसा ही हुआ है। और जो अपराध की दुनिया में अभी भी पैर जमाए हैं, उनका भविष्य भी विकास जैसा ही होगा। इसलिए अब हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि विकास दुबे जैसों को जो शक्तियां पनपाने का कार्य करती हैं, उनको सबक सिखाने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिशा में सार्थक और सकारात्मक पहल कर रहे हैं। वहां अपराधी या तो जेल में हैं या फिर उत्तर प्रदेश से बाहर हैं। इसे राजनीति के अपराध मुक्ति का अच्छा प्रयास ही कहा जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालांकि इस बारे में बहुत पहले ही संकेत दे दिया था कि अब उत्तर प्रदेश अपराध मुक्त होगा। ऐसे ही प्रयास देश के अन्य राज्यों की सरकारें करें तो निश्चित ही अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।

-सुरेश हिंदुस्थानी

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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