असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 22, 2016

सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई विट्ठल भाई पटेल एक महान राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने कभी भी झुकना नहीं सीखा। शुरू में महात्मा गांधी से प्रभावित रहे विट्ठल भाई चौरी चौरा की घटना के बाद महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने से काफी विचलित हुए थे और इसी के चलते वह नरम दल से गरम दल के नेता बन गए। सन 1871 में गुजरात के नाडियाद में जन्मे विट्ठल भाई पटेल काफी मेधावी थे और इसी कारण वह पढ़ाई के लिए लंदन जाने में सफल रहे। वहां उन्होंने तीन साल तक पढ़ाई की और अपनी कक्षा में प्रथम आए। वह 1913 में गुजरात लौटे और देखते ही देखते एक प्रभावशाली वकील के रूप में मशहूर हो गए। वह बम्बई और अहमदाबाद की अदालतों में वकील रहे।

विट्ठल भाई जहां गांधी जी के विचारों से असहमत थे वहीं राष्ट्रपिता द्वारा आजादी के लिए शुरू किए गए सभी आंदोलनों का उन्होंने समर्थन किया। वह कांग्रेस छोड़ चुके थे लेकिन जब गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया तो उन्होंने इसके समर्थन में असेंबली से इस्तीफा दे दिया। पूर्ण स्वराज की मांग की घोषणा किए जाने पर वह दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए। आंदोलन में शामिल होने पर अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते उन्हें 1931 में रिहा कर दिया गया ताकि वह उपचार के लिए यूरोप जा सकें। 

विट्ठल भाई पटेल ने नमक सत्याग्रह के अंत में फिर से कांग्रेस छोड़ दी और महात्मा गांधी के कटु आलोचक और सुभाष चंद्र बोस के घनिष्ठ सहयोगी हो गए। सुभाष चंद्र बोस को भी खराब स्वास्थ्य के चलते रिहा कर दिया गया। पटेल और बोस दोनों इलाज के लिए विएना पहुंचे चूंकि दोनों देशभक्तों के राजनीतिक विचार एक जैसे थे इसलिए वे एक दूसरे के बेहद करीब आ गए। दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा− क्योंकि राजनीतिक नेता महात्मा गांधी विफल हो चुके हैं− इसलिए नेतृत्व परिवर्तन आवश्यक है।

दोनों नेताओं ने जंग−ए−आजादी के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से समूचे यूरोप की यात्रा की और आयरलैंड के राष्ट्रपति से भी मिले। यूरोप में बोस के स्वास्थ्य में सुधार होता गया जबकि पटेल की हालत और बिगड़ गई। अंततः 22 अक्तूबर 1933 को जिनेवा में उनका निधन हो गया। उन्होंने लगभग एक लाख 20 हजार रुपए की संपत्ति राजनीतिक कार्यों के लिए सुभाष चंद्र बोस के नाम कर दी थी। विट्ठल भाई का शव भारत लाया गया और 10 नवम्बर 1933 को मुम्बई में उनका अंतिम संस्कार हुआ।

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