By अभिनय आकाश | Oct 24, 2026
पिछले कई सालों से जिस जमीन को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच घमासान जारी है वो क्या कभी खत्म भी होगा? यह सवाल इसीलिए कि इतनी लंबी जंग में यूक्रेन अपना खजाना और हथियार भंडार फूंक चुका है तो रूस को भी इस जंग की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इस जंग के साथ दुनिया में तेल, व्यापार और अनाज संकट पैदा हुआ सो अलग। इसीलिए दुनिया भर के जानकार मानते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौता बेहद जरूरी है। यह ना सिर्फ रूस और यूक्रेन के हित में है बल्कि यूरोप और एशिया के साथ तमाम विकासशील देशों के लिए भी फायदेमंद होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के इसी स्थाई समाधान के लिए मॉस्को में अपना विशेष दूत भेजा। पुतिन को शांति समझौते के लिए तैयार किया। इसका ऐलान खुद डोनल्ड ट्रंप ने किया। ट्रंप जिस वक्त ये ऐलान कर रहे थे, उसी रात पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर नए हमलों का आर्डर दे दिया। इन हमलों को पहले रूसी सेना की रूटीन कारवाई माना गया। लेकिन अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने हमले से भी बड़ा खतरनाक संकेत दिया। पुतिन जंग से पीछे नहीं हटेंगे। इस बयान से मिला घातक संकेत।
यूक्रेन का दावा है कि इन इलाकों पर कब्जा उसकी संप्रभुता पर हमला है और इसके खिलाफ वो आखिरी दम तक लड़ेगा। जेलस्की ने दावा किया कि अगर अमेरिका और पश्चिमी देश रूस के साथ सई सीएस फायर कराना चाहते हैं तो सबसे पहले उन्हें यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी पुख्ता करनी होगी। तो क्या यूक्रेन की इन शर्तों पर रूस तैयार होगा या रूस के जीते हुए इलाके न छोड़ने की बात पर यूक्रेन राजी होगा। पिछले 4 वर्षों में इन शर्तों पर कई बार बात हो चुकी है। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस बेनतीजा बातचीत के बीच रूस और यूक्रेन दोनों ने एक दूसरे पर हमले जारी रखे। अब बात एक दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करने तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अमेरिका की एंट्री इस बार निर्णायक हो सकती है क्योंकि ट्रंप ने रूस के साथ डीजल खरीदने का बहुत बड़ा सौदा किया है। ट्रंप कतई नहीं चाहेंगे कि रूस के ऊर्जा ठिकाने यूक्रेन की बमबारी में तबाह हो।