By अंकित सिंह | Dec 26, 2025
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में हालात सुधर नहीं रहे हैं। इसके चार विधायकों में से तीन ने पटना में पार्टी प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर आयोजित 'लिट्टी चोखा' पार्टी में भाग नहीं लिया। वहीं दूसरी ओर, अनुपस्थित विधायक - माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह - बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ बैठक में थे। आरएलएम भाजपा-जेडीयू के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है, जिसने हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की।
आरएलएम प्रमुख को पार्टी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रोल किया। एक पार्टी कार्यकर्ता ने इस विवादित मुद्दे पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में टिप्पणी की, “आरएलएम एक परिवार-केंद्रित पार्टी बन गई है। कुशवाहा ने पहले अपनी पत्नी को विधायक बनाया और फिर अपने बेटे को राज्य की नई एनडीए सरकार में मंत्रिमंडल मंत्री बनाया।” रामेश्वर महतो ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “पार्टी के इस फैसले से पार्टी की विचारधारा के बारे में गलत संदेश गया है।”
हालांकि, आरएलएम के एक वरिष्ठ नेता ने विधायकों की बैठक का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के साथ विधायकों की बैठक कोई असामान्य बात नहीं थी। नेता ने कहा, “नितिन नबीन की नियुक्ति के बाद यह उनके साथ एक शिष्टाचार मुलाकात थी। इस बैठक का कोई राजनीतिक महत्व नहीं है।” हालांकि, आरएलएम के महासचिव और प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा ने जोर देकर कहा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है और उसके सभी चार विधायक पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।