By संतोष उत्सुक | Jul 16, 2021
अच्छी तरह से सठियाने के बाद मुझे विश्वास हो चला है कि आत्माएं कई प्रकार की होती हैं। आत्मा की आवाजें भी होती हैं जो अलग अलग किस्म की होने के कारण तरह तरह के प्रभाव लिए होती हैं। मिसाल के तौर पर सादी, सरल व सभ्य आत्मा की आवाज़ दबी दबी मरियल सी होती है जो आम आदमी के शरीर में फंसी रहती है और आम तौर पर अनसुनी की जाती है। यह तो हुई आत्मा की आवाज़ की बात। आम आत्मा शरीर छोड़ जाए तो जान पहचान के लोग दुनिया की प्रसिद्ध किताब फेसबुक में आरआईपी या आत्मा, स्वर्ग में शांति से रहना, लिखकर जीवित को आत्मबल देने का कर्तव्य निभाते हैं।
ऐसी आवाजों से यह नवज्ञान भी प्राप्त होता है कि जीवित शरीर में आत्मा कभी चैन से नहीं रहती। भला जो आत्मा दुनियावी मसलों में, हाड़मांस के पुतले इंसान को ऐसे, वैसे न जाने कैसे कैसे सक्रिय परामर्श दे रही हो, उसे निवृत होने के बाद तो नरक में ही जाना पडेगा न। उसे स्वर्ग में आसानी से अस्थायी सीट भी मिलने का सवाल पैदा नहीं होता। यह बात आम इंसान नहीं समझता तभी तो किसी भी रंग की आत्मा के शरीर छोड़ने के अप्रत्याशित अवसर पर फेसबुक पर ‘लाइक’ का बटन भी दबा देता है, यह मानते हुए कि अमुक आत्मा इस नश्वर संसार के जंजाल से छूट गई है। वास्तव में बेचारी ज़्यादातर आत्माएं, इंसान की गलत करतूतों के कारण नरक में जाकर, निश्चित ही भांति भांति के कष्ट भोग रही होती है और इधर ज़्यादातर लोग यही कामना कर रहे होते हैं कि आत्मा को शांति मिले, स्वर्ग में आत्मा शांति से रहे।
कुछ आत्माओं को महान भी घोषित किया जाता है। जीवित बंदे शारीरिक मोह से छूट चुकी आत्माओं को झूठे ख़्वाब दिखा रहे होते हैं जबकि आत्मा इन तुच्छ विचारों से दूर शांत ही रहती हैं। छोटे छोटे स्वार्थों की गिरफ्त में फंसा आदमी, आत्मा को किसी महंगी चीज़ का टुकडा समझता है जिसे नरक में नहीं स्वर्ग में ही रखा जाना चाहिए। जब आत्मा, नश्वर शरीर में कुलबुला रही होती है, हम उसकी आवाज़ दबाते फिरते हैं और बाद में आत्मा की अंतरात्मा की खुराफाती आवाजें सुनने और सुनाने की कोशिशें करते रहते हैं।
- संतोष उत्सुक