अमेरिका में वोटिंग डे, मिड टर्म चुनाव में बड़ा उलटफेर! ट्रंप का क्या होगा?

By अभिनय आकाश | Nov 03, 2026

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म चुनावों को लेकर राजनैतिक सरगर्मी तेज हो रही है। इन चुनावों को लेकर जो अनुमान सामने आ रहे हैं वो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए बहुत राहत देने वाले नहीं है। माना जा रहा है कि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा में अपना कंट्रोल हासिल कर सकती है। इतना ही नहीं सीनेट में भी डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति पहले से मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो ट्रंप के लिए आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं क्योंकि अभी तक ट्रंप अपनी पार्टी के समर्थन के सहारे कई बड़े फैसले लेते आए हैं। लेकिन संसद में विपक्ष मजबूत हो गया तो हर बड़े फैसले पर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर 4 साल में होता है। लेकिन राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच यानी लगभग 2 साल बाद संसद के लिए चुनाव कराए जाते हैं। इन्हें ही मिड टर्म चुनाव कहा जाता है। इन चुनावों में राष्ट्रपति का चुनाव नहीं होता बल्कि अमेरिकी संसद के सदस्यों और कुछ राज्यों के गवर्नर्स को चुनने के लिए वोटिंग होती है। 

ट्रंप ने अपनी दूसरी पारी में कई ऐसे फैसले लिए हैं जिनका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था से लेकर दुनिया की राजनीति तक देखने को मिल रहा है। उनकी विदेश नीति, दूसरे देशों के साथ व्यापार को लेकर अपनाया गया सख्त रवैया और ईरान के साथ जारी संघर्ष जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में है। अब इन सभी फैसलों का राजनैतिक हिसाब किताब भी इन्हीं चुनावों में दिखाई दे सकता है। अभी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 सीटें हैं। जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 213 सीटें हैं। इसके अलावा कुछ सीटों की स्थिति अलग है और एक स्वतंत्र सदस्य भी है। यानी दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला बेहद करीबी है। ऐसे में अगर डेमोक्रेटिक पार्टी कुछ सीटें अपने पक्ष में करने में कामयाब हो जाती तो प्रतिनिधि सभा में सत्ता का समीकरण बदल सकता है। वहीं सीनेट में भी मुकाबला बहुत इंपॉर्टेंट है। यहां कुल 100 सीटें हैं और बहुमत के लिए सामान्य तौर पर 51 सीटों की जरूरत होती है। हालांकि बराबरी की स्थिति में उपराष्ट्रपति का जो वोट होता है वो निर्णायक होता है। इसलिए सीनेट में कुछ सीटों का इधर से उधर होना भी ट्रंप की सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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इस बार खास नजर कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, जॉर्जिया और मिगन जैसे राज्यों पर भी रहने वाली है। इन राज्यों में गवर्नर के चुनाव और दूसरे महत्वपूर्ण मुकाबले राजनीतिक माहौल को समझने में मदद कर सकते हैं। अमेरिका में राज्यों के चुनावों का असर सिर्फ स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहता बल्कि कई बार यही चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा का संकेत भी देते हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर ट्रंप के खिलाफ माहौल बनने की आशंका इस बार इतनी क्यों जताई जा रही है? इसका एक बड़ा कारण है महंगाई और आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर बड़ता दबाव। किसी भी देश में आम जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में यही रोजगार, कमाई, घर का खर्चा, पेट्रोल, डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें शामिल होती। अमेरिका भी इससे अलग नहीं। अगर लोगों को लगता है कि उनकी कमाई के मुकाबले खर्च तेजी से बढ़ रहा है तो वह सरकार से नाराज हो सकते हैं। अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, किराने के सामान का महंगा होना और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े खर्च जैसे मुद्दे अमेरिकी मतदाताओं के लिए बहुत अहम बने हुए हैं। खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा हो। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो उसका इंपैक्ट पेट्रोल की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे आम लोगों के परिवहन और दूसरे खर्च भी जाहिर है बढ़ते हैं। यानी ट्रंप के सामने चुनौती सिर्फ विपक्षी पार्टी से मुकाबला करने की नहीं है बल्कि उन्हें यह भी साबित करना होगा कि उनकी नीतियों से आम अमेरिकी नागरिकों की जिंदगी बेहतर हो रही है। 

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