Women Health: अनचाही Pregnancy से बचना है, Period Cycle ट्रैक करने का यह है सही तरीका

By अनन्या मिश्रा | Jan 14, 2026

हर महीने होने वाली पीरियड साइकिल के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। पीरियड क्रैंप्स के अलावा वॉमिटिंग, ब्लोटिंग और थकान शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है। ऐसे में अगर आप अपनी पीरियड साइकिल को ट्रैक करती हैं, तो इस तरह की अनियमितताओं से बची रह सकती हैं। वहीं इस दौरान शरीर को हेल्दी और एक्टिव रखने के लिए लोग कई तरह के पीरियड ट्रैक का भी प्रयोग करते हैं, जिससे कि वह इन खास दिनों में अपनी उचित देखभाल कर पाएं। पीरियड साइकिल ट्रैक करने से आप अनचाही प्रेग्नेंसी से भी बच सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस तरह से अपनी मंथली साइकिल ट्रैक कर सकती हैं। 


पीरियड साइकिल

पीरियड की लेंथ आपकी प्रेग्नेंसी को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। सामान्य रूप से पीरियड साइकिल की लेंथ 21 से 35 दिनों के अंदर मानी जाती है। इसमें महिलाओं को 3 से 7 दिनों तक ब्लीडिंग से गुजरना पड़ता है। अगर आप अपनी पीरियड साइकिल को ट्रैक करते हैं, तो आपको ओव्यूलेशन साइकिल की जानकारी मिल जाती है। ओव्यूलेशन साइकिल उस प्रोसेस को कहते हैं, जब एग्स फर्टाइल होकर ओवरी में रिलीज होते हैं। इसके बाद अंडे फैलोपियन ट्यूब में जाते हैं।

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पीरियड साइकिल में इन चीजों को ट्रैक करें


ब्लड फ्लो

पीरियड साइकिल के दौरान होने वाले ब्लड फ्लो का ख्याल रखना जरूरी है। इससे आप स्टेन्स की समस्या से बची रह सकती हैं। वहीं इस बात को भी ट्रैक करें कि आपको पीरियड के दौरान किन दिनों में ज्यादा ब्लीडिंग होती है। वह कौन से दिन होते हैं, जब आप क्लॉटिंग से होकर गुजरते हैं।


पीरियड क्रैंप्स

पीरियड के दौरान अगर आपको भी दर्द और ऐंठन महसूस होती है, तो इस बात का ख्याल रखें कि आपको कितना ऐंठन और दर्द होता है। अधिकतर महिलाओं को पहले और दूसरे दिन ज्यादा और फिर बाद में हल्के क्रैंप्स का अनुभव होता है। लेकिन अगर आपको पीरियड के दौरान क्रैंप्स ज्यादा होते हैं, जिस वजह से आपकी डेली रूटीन डिस्टर्ब होती है, तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। यह असामान्य दर्द PCOD जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है। कई बार आपका खानपान और लाइफस्टाइल भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है।


इतने दिनों का रखें रिकॉर्ड

बता दें कि सामान्य पीरियड साइकिल की लेंथ 28 दिन की मानी जाती है। यह आमतौप पर 21 दिन से लेकर 35 दिनों के भीतर रहती है। पीरियड कम से कम 21 दिन और ज्यादा से ज्यादा 40 दिनों तक आ सकता है। लेकिन अगर आपकी पीरियड साइकिल बार-बार डिस्टर्ब हो रही है, या फिर 2 सप्ताह से ज्यादा डिले हो रहा है। तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।


साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपकी पीरियड साइकिल कितने दिनों तक चलती है। इसकी जानकारी रखने से आप अपने ओव्यूलेशन साइकिल को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। ऐसे में आपको प्रेग्नेंसी प्लान करने में आसानी होगी।


इमोशनल हेल्थ न करें इग्नोर

प्री. मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में महिलाओं को मूड स्विंग्स झेलने पड़ते हैं। उदास हो जाना, बात-बात पर रोना और एकांत में रहना इसके प्राथमिक लक्षण हैं। इसके साथ ही महिलाओं की एपिटाइट और स्लीप साइकिल भी प्रभावित होने लगता है।


पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स होते हैं। जिस कारण महिलाओं में थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव की समस्या बढ़ने लगती है। इसलिए अपने इमोशनल हेल्थ को मजबूत बनाए रखने के लिए शरीर को एक्टिव रखें।

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