By अभिनय आकाश | Aug 22, 2025
अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात होती है। ठीक उसके बाद वाशिंगटन में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से ट्रंप की मुलाकात। ऐसा लगा कि बहुत जल्द रूस और यूक्रेन के बीच की जंग रुक जाएगी। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है। वो पूरी दुनिया के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से में एक बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले में एक अमेरिकन इलेक्ट्रॉनिक की कंपनी को निशाना बनाया गया। जिसमें करीब 600 कर्मचारी काम कर रहे थे। 21 अगस्त की रात रूस ने यूक्रेन पर अपने इस सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया। यूक्रेन की वायु सेना ने कहा कि रूस ने इस साल यूक्रेन पर अपना सबसे बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागी गईं। उसने बताया कि हमले ज्यादातर देश के पश्चिमी इलाकों को निशाना बनाकर किए गए।
यूक्रेन पर रूस के हमलों ने एक बार फिर हालात को तनावपूर्ण बना दिया है। एक तरफ जहां शांति वार्ता की संभावनाएं बन रही थी। दोनों देशों के बीच संवाद की उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में रूस की ओर से हुए हमले के बाद से शांति वार्ता की सारी संभावनाएँ बिखड़ती नजर आ रही हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह ऐसे अंजाम दिया गया मानो बिल्कुल भी कुछ बदल ही नहीं रहा हो। उन्होंने कहा कि मास्को ने युद्ध समाप्त करने के लिए सार्थक वार्ता की कोई इच्छा नहीं दिखाई है। उन्होंने इस हमले की प्रतिक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ा दबाव बनाने का आग्रह किया, जिसमें सख्त प्रतिबंध और शुल्क (टैरिफ) लगाना शामिल हैं।
इस हमले के तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रूथ सोशल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बाइडेन प्रशासन की यूक्रेन नीति की आलोचना करते हुए लिखा कि बिना आक्रमण कर युद्ध नहीं जीता जा सकता। केवल यूक्रेन को बचाव की इजाजत देना एक रणनीतिक भूल हैं। उन्होंने जो बाइडेन की नीती की आलोचना की। उन्होंने ये भी दावा किया कि अगर वो राष्ट्रपति होते तो ये युद्ध कभी शुरू नहीं होता। वहीं ट्रंप ने एक तस्वीर भी पोस्ट की जिसमें वो रूसी राष्ट्रपति पुतिन को ऊंगली दिखाते नजर आ रहे हैं। ये तस्वीर 1950 के दशक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और सोवियत नेता निकिता खुश्रेव की ऐतिहासिक मुलाकात की याद दिलाती है। जहां निक्सन ने भी इसी तरह की प्रतिक्रियादी थी। माना जा रहा है कि ट्रंप इस इशारे के माध्यम से ये संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका रूस की तुलना में अधिक शक्तिशाली है।