By अनन्या मिश्रा | Jul 30, 2026
कैंसर का नाम सुनते ही हम परेशान हो उठते हैं। लेकिन अगर शरीर में होने वाले हर अच्छे बुरे बदलाव पर ध्यान दिया जाए, तो किसी भी गंभीर बीमारी का आसानी से पता लगाया जा सकता है। ऐसी ही एक बीमारी टेस्टिकुलर कैंसर है। यह कैंसर 15 से 40 साल के आयु वाले पुरुषों में सबसे ज्यादा आम कैंसरों में से एक है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर शुरूआती स्टेज में ही इस बीमारी का पता चल जाए, तो इससे छुटकारा भी मिल सकता है।
टेस्टिकुलर कैंसर अन्य कैंसर की तुलना में धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए कई बार लोग इसके लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं। तो आइए जानते हैं टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षण क्या हैं, जिनको समझकर आप इस गंभीर बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं।
टेस्टिकल्स में सूजन या फिर लम्प की समस्या शुरू हो सकती है। यह सबसे बड़ा संकेत होता है कि एक अंडकोष में बिना दर्द की गांठ या फिर सूजन होना है। क्योंकि हर गांठ कैंसर नहीं होती है। लेकिन फिर भी असामान्य बदलाव की जांच करवानी चाहिए। वहीं कुछ पुरुषों को महसूस हो सकता है कि अंडकोष सामान्य से भारी, बड़ा या ज्यादा सख्त है।
अगर आपको टेस्टिकल्स के साइज या शेप में अचानक कुछ बदलाव महसूस हो, तो आपको डॉक्टर से साथ इस बदलाव को शेयर करना चाहिए।
स्क्रोटम में बिना लम्प या गांठ के भी भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए अगर आपको भी भारीपन महसूस हो रहा है। तो इसको इग्नोर करने की गलती नहीं करनी चाहिए।
टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में पेट के निचले हिस्से में दर्द, अंडकोश में हल्का दर्द, जांघों के जोड़ या बेचैनी आदि महसूस हो सकती है। अंडोकोष में लगातार दर्द या भारीपन महसूस होना आदि लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में अंडकोष को आसपास तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिस कारण भी सूजन हो सकती है।
अधिकतर मामलों में कैंसर की गांठ में दर्द नहीं होता है। हालांकि कुछ मामलों में स्क्रोटम में जलन या फिर दर्द जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको दो सप्ताह से अधिक दर्द रहता है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में स्क्रोटम में तरल पदार्थ का जमा होना भी है। स्क्रोटम में तरल पदार्थ की वजह से सूजन की समस्या हो सकती है।
अगर लोअर बैक में दर्द महसूस हो रहा है। तो बता दें कि कई बार टेस्टिकुलर कैंसर के लक्षणों में बिना कारण थकान, पीठ दर्द, वेट कम होना या फिर सांस लेने में तकलीफ होना जैसी समस्या हो सकती है।
टेस्टिकुलर ट्यूमर ऐसा हॉर्मोन सीक्रेट कर सकता है, जिसकी वजह से मेल ब्रेस्ट में पेन, सूजन या ब्रेस्ट सॉफ्ट महसूस हो सकते हैं। कैंसर एक्सपर्ट की मानें तो युवा पुरुषों को इसके बारे में जागरुक किया जाना चाहिए कि सामान्य रूप से उनके अंडकोष कैसे दिखते हैं। इससे हर महीने खुद से जांच करने से बदलावों को पता जल्दी चल सकता है। सूजन, गांठ या आकार में बदलाव होने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
15 से 40 साल के पुरुषों में इस बीमारी का अधिक खतरा होता है।
अगर परिवार में पहले किसी को कैंसर हुआ हो।
पिता या भाई को पहले टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।
व्यक्ति को पहले कभी टेस्टिकुलर कैंसर हुआ हो।
इनफर्टिलिटी या फिर टेस्टिकुलर एब्नॉर्मल्टिज की समस्या।
एन्वॉयरमेंट या लाइफस्टाइल की वजह से भी टेस्टिकुलर कैंसर का जोखिम रहता है।
बता दें कि युवा पुरुष सबसे ज्यादा टेस्टिकुलर कैंसर से प्रभावित होते हैं। इसलिए यह याद रखना जरूरी होता है कि शुरूआती स्टेज में हमेशा टेस्टिकुलर कैंसर दर्दनाक नहीं होता है। किसी भी तरह का असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें। इससे बीमारी का जल्दी पता चलता है और इलाज में आसानी हो सकती है। टेस्टिकुलर कैंसर से लड़ने के लिए जागरुकता के साथ-साथ समय पर कदम उठाना जरूरी है।