Prabhasakshi Exclusive: Ukraine को ताकत दिखाने का मौका देना क्या Russia की कोई चाल थी? Putin की Mongolia यात्रा के क्या मायने हैं?

By नीरज कुमार दुबे | Sep 05, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब किस मोड़ पर है? हमने जानना चाहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगोलिया की यात्रा पर क्यों पहुँचे हैं? साथ ही मंगोलिया ने पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का वारंट होने के बावजूद उनको गिरफ्तार क्यों नहीं किया? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि रूस ने यूक्रेन के मध्य भाग में इस साल का सबसे बड़ा हमला किया है जिसमें 50 से ज्यादा लोगों के मारे जाने और 180 लोगों के घायल होने की खबर है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को चलते हुए 925 दिन हो गये हैं लेकिन समाधान की ओर जाने वाला रास्ता अब तक नहीं दिखाई दे रहा है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दूसरी ओर रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी सेना ने पोक्रोव्स्क से लगभग 30 किलोमीटर (19 मील) दूर प्रीचिस्टिव्का और कार्लिव्का की बस्तियों पर नियंत्रण कर लिया है। उन्होंने कहा कि बेलगोरोड के क्षेत्रीय गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव ने कहा है कि यूक्रेन द्वारा रूसी सीमा क्षेत्र के एक गांव पर गोलाबारी के बाद तीन लोग मारे गए और दो घायल हो गए। उन्होंने कहा कि रूस के रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि उसने पोल्टावा में एक सैन्य शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल पर हमला किया। रूस ने दावा किया है कि वह सैनिकों, विदेशी प्रशिक्षकों और ड्रोन ऑपरेटरों को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ दिन पहले यूक्रेन को ताकत दिखाने का मौका देकर रूस ने उसे अपनी चाल में फंसा लिया है क्योंकि बड़ी संख्या में यूक्रेनी सैनिक रूस में फंस गये हैं और दूसरी ओर रूसी सैनिक धड़ाधड़ यूक्रेन पर कब्जा करते चले जा रहे हैं।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दूसरी ओर, यूक्रेन ने पुतिन को गिरफ्तार करने में मंगोलिया की विफलता की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय वारंट पर वांछित क्रेमलिन नेता व्लादिमीर पुतिन को गिरफ्तार करने में मंगोलिया की विफलता ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून प्रणाली को गंभीर झटका दिया है। उन्होंने कहा कि पुतिन रूस और चीन को जोड़ने वाली एक नई गैस पाइपलाइन पर केंद्रित बातचीत के लिए मंगोलिया पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि माना यह भी जा रहा है कि चेचन्या के अलावा मंगोलिया से भी लड़ाकों को भेजने के लिए पुतिन आग्रह करके आये हैं। उन्होंने कहा कि पुतिन के खिलाफ पिछले साल अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि अदालत का यह वारंट मंगोलिया सहित 124 सदस्य देशों को उनके क्षेत्र में कदम रखते ही रूसी राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने और मुकदमे के लिए हेग में स्थानांतरित करने के लिए बाध्य करता है लेकिन इसका पालन नहीं किया गया।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यूक्रेनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हेरही तिखाई ने कहा कि पुतिन को हिरासत में लेने में मंगोलिया की विफलता "अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और आपराधिक कानून की व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।'' उन्होंने बताया कि तिखाई ने टेलीग्राम मैसेजिंग ऐप पर लिखा है कि मंगोलिया ने एक आरोपी अपराधी को न्याय से बचने की इजाजत दी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगा कि मंगोलिया को इसके परिणाम भुगतने पड़ें। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि मॉस्को को वारंट के संबंध में किसी भी कार्रवाई के बारे में कोई चिंता नहीं थी। उन्होंने कहा कि रूस ने मंगोलिया के साथ एक सार्थक बातचीत की थी और यात्रा के सभी पहलुओं पर पहले से चर्चा की गई थी। हम आपको बता दें कि आईसीसी वारंट में पुतिन पर यूक्रेन से सैंकड़ों बच्चों को अवैध रूप से निर्वासित करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि क्रेमलिन ने आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि यह राजनीति से प्रेरित है।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि इसके अलावा, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगियों को न केवल अपने हथियारों को रूस के अंदर हमलों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए, बल्कि कीव को खुद भी अधिक हथियार मुहैया कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने लंबे समय से साझेदारों से आग्रह किया है कि वह उसे दुश्मन के इलाके में दूर स्थित लक्ष्यों पर पश्चिमी हथियारों से हमला करने की अनुमति दे और यूक्रेनी ऊर्जा प्रतिष्ठानों, अन्य बुनियादी ढांचे और आवासीय भवनों पर रूसी हवाई हमलों के तेज होने के कारण ये मांगें और तेज हो गई हैं।

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