बिगड़ती कानून व्यवस्था का खामियाजा पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ रहा है

By प्रह्लाद सबनानी | Feb 22, 2024

किसी भी देश में आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए उस देश में सामाजिक शांति बनाए रखना अति आवश्यक है। यही शर्त किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति के सम्बंध में भी लागू होती है। भारत का पश्चिम बंगाल राज्य कुछ वर्ष पूर्व तक भारत में सबसे तेज गति से आर्थिक प्रगति कर रहे राज्यों के बीच अग्रिम पंक्ति में रहता आया है। परंतु, हाल ही के वर्षों में पश्चिम बंगाल में शांति भंग होती दिखाई दे रही है, इसका प्रभाव स्पष्टत: इस राज्य के आर्थिक विकास पर भी विपरीत रूप से पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।    

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संदेशखाली, पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का एक छोटा कस्बा है। यह बांग्लादेश की सीमा से सटा सीमावर्ती क्षेत्र भी है, जहां हिंदू अनुसूचित जातियों की आबादी बहुलता में है। संदेशखाली, पश्चिम बंगाल की उन 14 विधानसभा की सीटों में शामिल हैं जोकि भारत बांग्लादेश सीमा से सटीं हुई हैं। दुर्भाग्य से संदेशखाली सहित यह सभी विधानसभा सीटें अतिवादी संगठनों द्वारा समर्थित सुनियोजित षड्यंत्र का एक हिस्सा बन गई हैं। इन 14 सीमावर्ती विधान सभा क्षेत्रों में बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ उल्लेखनीय रूप से बढ़ रही है। यहां की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश का षड्यंत्र भी उच्च स्तर पर हो रहा है। वास्तव में, यह क्षेत्र पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी ISI की आतंकी गतिविधियों के अलावा तमाम आपराधिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहा है। कुछ समय पहले तक संदेशखाली में मुस्लिम जनसंख्या नहीं के बराबर थी, लेकिन अवैध घुसपैठ के चलते यहां असामाजिक तत्वों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह इलाका जनसांख्यिकी परिवर्तन की चपेट में आ गया है। इसमें सबसे बड़ी आबादी अब रोहिगियाई मुसलमानों की हो गई है। 

गौर करने वाली बात है कि विगत चुनावों के दौरान घटित सभी आपराधिक घटनाओं में अधिकतर अपराधी असामाजिक तत्व मुस्लमान ही पाए गए थे। यह मामले गौ-तस्करी से लेकर मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े रहे हैं। इस तरह के सभी गैरकानूनी मामलों में मुस्लिम ही अभियुक्त पाए जाते हैं। संदेशखाली में जो कुछ सामने आया है अथवा आ रहा है, यह कोई पहली बार घटित हुई वारदातें नहीं है। हिंदू महिलाओं के साथ गैंग रेप की एक नहीं बल्कि सैंकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिसके खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने जब भी आवाज उठायी है तो परिणाम में उन्हें ही निशाना बनाना शुरू कर दिया गया है। न सिर्फ संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है बल्कि उनके घरों को भी जला दिया गया है। इस क्षेत्र में हिंदू अनुसूचित जाति की महिलाओं एवं नाबालिग़ लड़कियों को इस इलाके के दबंग घुसपैठिए अपनी हवस का शिकार बनाने के उद्देश्य से जबरन उठा ले जाते हैं। इस क्षेत्र में तस्करी, मादक पदार्थ, हथियार, गोमांस आदि अपराधों में संलिप्त शेख शहंशाह जैसे मुस्लिम दबंगों का बोलबाला है। हाल ही में शेख शहंशाह के ठिकानों पर छापेमारी के लिए गई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर उसके गुर्गों द्वारा हिंसक हमला भी किया गया था। इस हमले में ED के कई अधिकारी गम्भीर रूप से घायल हुए थे । इस इलाके में नौकरी/रोजगार, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ देने की आड़ में भी अनेक महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया है। 

पश्चिम बंगाल के विशेष इलाके संदेशखाली में घटित उक्त घटनाओं का वर्णन केवल उदाहरण के तौर पर किया गया है। वरना, पूरे पश्चिम बंगाल में ही आज अराजकता का माहौल है जो पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति को विपरीत रूप में प्रभावित कर रहा है।

लगभग 1960 के दशक तक पश्चिमी बंगाल की औसत प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय से अधिक हुआ करती थी। पश्चिम बंगाल, भारत के प्रथम तीन सबसे अधिक धनी राज्यों में शामिल था। पहले दो राज्य थे- महाराष्ट्र एवं गुजरात। 1980 का दशक आते आते पश्चिम बंगाल की औसत प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय के लगभग बराबर तक नीचे आ गई थी। 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय पश्चिम बंगाल की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ने लगी और पश्चिम बंगाल का स्थान देश में 7वें स्थान पर आ गया। वर्ष 2000 में और भी नीचे गिरकर 10वें स्थान पर आ गया एवं वर्ष 2011 में यह 11वें स्थान पर आ गया। यह गिरावट आज भी जारी है और आज पश्चिम बंगाल औसत प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में 14वें स्थान पर आ गया है।  

इसी प्रकार, वर्ष 1993-94 एवं 1999-2000 के बीच पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि अर्जित की गई थी जबकि भारत का राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 4.6 प्रतिशत था। अगली दशाब्दी में पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर गिरकर 4.9 प्रतिशत रह गई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2011-12 से लेकर वर्ष 2019-20 के दौरान पश्चिम बंगाल में औसत प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर और भी नीचे गिरकर 4.2 प्रतिशत हो गई जबकि राष्ट्रीय स्तर पर औसत 5.2 प्रतिशत रहा। इस प्रकार पश्चिम बंगाल एवं राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर में यह अंतर और भी बढ़ता ही जा रहा है। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि 1990 के दशक में पश्चिम बंगाल में विकास दर राष्ट्रीय स्तर पर औसत विकास दर से अधिक थी। परंतु, वामपंथी दलों के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में विकास दर राष्ट्रीय औसत से कम हो गई थी। पश्चिम बंगाल पर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लगातार कांग्रेस, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस का शासन रहा है। विशेष रूप से वामपंथी दलों एवं तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पश्चिम बंगाल की आर्थिक प्रगति विपरीत रूप से प्रभावित होती रही है।      

वर्ष 2022 में पश्चिम बंगाल में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 157,254 रुपए था जबकि विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए अनुमानों के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद का राष्ट्रीय औसत 2411 अमेरिकी डॉलर था। यदि 80 रुपए प्रति डॉलर की दर पर अमेरिकी डॉलर को रुपए में बदला जाए तो यह राशि लगभग 164,000 रुपए प्रति व्यक्ति रहती है, जो पश्चिम बंगाल में प्रति व्यक्ति औसत से कहीं अधिक है। जबकि पश्चिम बंगाल किसी समय पर भारत के समस्त राज्यों के बीच सबसे तेज गति से आर्थिक प्रगति करता हुआ राज्य रहा है। यह देश की आर्थिक राजधानी भी माना जाता रहा है। आज आर्थिक प्रगति के मामले में पश्चिम बंगाल की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। यह सब पश्चिम बंगाल में छिन्न-भिन्न हो रहे सामाजिक ताने बाने के चलते एवं उपरोक्त वर्णित संदेशखाली जैसी घटनाओं में हो रही वृद्धि के चलते हो रहा है। 

-प्रह्लाद सबनानी 

सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक

भारतीय स्टेट बैंक

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