By रेनू तिवारी | Mar 25, 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर ने अपनी नई पार्टी 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के बीच एक औपचारिक और 'अटूट' गठबंधन की घोषणा कर दी है। कबीर ने ओवैसी को अपना "बड़ा भाई" बताते हुए राज्य की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण के संकेत दिए हैं।बुधवार को मीडिया से बात करते हुए हुमायूँ कबीर भावुक और आक्रामक दोनों नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल चुनावी समझौता नहीं, बल्कि एक लंबी राजनीतिक साझेदारी है।
ओवैसी की रैलियाँ: गठबंधन को मजबूती देने के लिए ओवैसी बंगाल में कम से कम 20 बड़ी जनसभाएं करेंगे। इसकी शुरुआत 1 अप्रैल को बहरामपुर से होगी।
अटूट निष्ठा: कबीर ने कहा, "यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा। जब तक मैं जीवित हूँ, ओवैसी मेरे बड़े भाई रहेंगे और हम मिलकर बंगाल के हक की लड़ाई लड़ेंगे।"
TMC और अन्य विपक्षी दलों ने इस गठबंधन को 'वोट कटवा' राजनीति करार दिया है।
TMC का हमला: सांसद सौगत रॉय ने इसे एक "बुरा घटनाक्रम" बताते हुए कहा कि ओवैसी असल में BJP की मदद कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे मुस्लिम जनता अलग-थलग पड़ जाएगी और इसका कोई चुनावी असर नहीं होगा।
विपक्ष का तर्क: कांग्रेस और अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों का मानना है कि यह गठबंधन "धर्मनिरपेक्ष वोटों" को विभाजित करेगा, जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है।
कबीर ने कहा, "उन्हें बड़ा भाई मानकर मैं चुनाव में उनके साथ मिलकर लड़ रहा हूँ। मैंने अपने बड़े भाई से अपील की है, इसलिए मेरे बड़े भाई कम से कम 20 रैलियों में मेरे साथ होंगे।" AJUP प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि बंगाल का मुस्लिम समुदाय उनके साथ खड़ा है और दोनों पार्टियाँ मिलकर और भी ज़्यादा ताक़त के साथ चुनाव लड़ेंगी।
रैलियाँ मुर्शिदाबाद, उत्तरी बंगाल, मालदा, बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर, आसनसोल और कोलकाता सहित प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में आयोजित करने की योजना है। कबीर ने कहा, "हमारी पहली रैली 1 अप्रैल को बहरामपुर में ओवैसी के साथ होगी। मेरे बड़े भाई वहाँ दोपहर 1:00 बजे मौजूद रहेंगे। मैं बहरामपुर में अपने बड़े भाई के साथ लाखों लोगों की मौजूदगी में वह पहली जनसभा आयोजित करूँगा।"
उन्होंने आगे बताया कि बाद की रैलियों की तारीख़ों की घोषणा जल्द ही की जाएगी, और यह भी जोड़ा कि बिहार और हैदराबाद के नेता इन रैलियों में उनके साथ शामिल होंगे। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, कबीर ने चुनाव प्रचार के हर पहलू में ओवैसी के दिखाए रास्ते पर चलने की अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। उन्होंने पूरी दृढ़ता से कहा, "इस गठबंधन के ज़रिए, मेरे भाई जो भी फ़ैसला लेंगे और जो भी दिशा दिखाएंगे, आने वाले दिनों में मैं उसी का पालन करूंगा। यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा," और इस तरह उन्होंने इस साझेदारी के प्रति अपनी निष्ठा को और मज़बूत किया। कबीर ने यह भी साफ़ कर दिया कि यह गठबंधन सिर्फ़ 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए ही नहीं है, बल्कि भविष्य के चुनावों में भी जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं और राजनीति में हूं, 2026 में हमने जो सफ़र साथ मिलकर शुरू किया था, वह जारी रहेगा।"
इससे पहले सोमवार (23 मार्च) को, विपक्षी नेताओं ने AIMIM और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के बीच हुए गठबंधन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के कदम वोटों को बांट सकते हैं और "धर्मनिरपेक्ष पार्टियों" को कमज़ोर कर सकते हैं। TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे एक "बुरा घटनाक्रम" बताया और कहा कि इससे "मुस्लिम जनता अलग-थलग पड़ सकती है।" समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, रॉय ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "ओवैसी का संगठन असल में BJP की मदद कर रहा है। लेकिन इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उनके पास न तो ताक़त है और न ही उन्हें वोट मिलेंगे।"