नारों से गूंज रहा बंगाल, कहीं 'ममता' के नारे ममता को ही न पड़ जाएं भारी, भाजपा मौका भुनाने से नहीं चूकती !

By अनुराग गुप्ता | Mar 02, 2021

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अब राजनीति गर्माती हुई नजर आ रही है। जहां एक तरफ सोशल मीडिया में बुजुर्ग महिला के साथ कथित मारपीट का मामला छाया हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ बंगाल नारों की राजनीति में छाया हुआ है। ममता बनर्जी का नया नारा 'खेला होबे' अब तृणमूल पर ही भारी पड़ रहा है क्योंकि भाजपा इस नारे को ममता बनर्जी के खिलाफ ही इस्तेमाल कर रही है। 

मौका भुनाना जानती है भाजपा

आपको ज्ञात होगा कि लोकसभा चुनाव के दरमियां कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया था लेकिन यह नारा कितना कारगर हुआ, यह आज सभी के सामने है। मगर भाजपा ने मौके को भुनाते हुए 'चौकीदार चोर है' नारे में थोड़ा परिवर्तन कर 'मैं भी चौकीदार हूं' कैंपेन चलाया और लोगों ने इस कैंपेन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इतना ही नहीं भाजपा नेताओं से लेकर पार्टी समर्थकों तक ने अपने ट्विटर अकाउंट में अपने नाम के आगे चौकीदार शब्द को शामिल कर लिया था। 

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भाजपा ने मानी था धमकी

तृणमूल कांग्रेस ने जब 'खेला होबे' नारा दिया तो भाजपा के लिए यह किसी धमकी से कम नहीं था लेकिन मौके को अच्छी तरह से भुनाने वाली भाजपा ने 'खेला होबे' का इस्तेमाल तृणमूल के खिलाफ ही कर दिया। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खेला होबे नारे का जिक्र किया और उन्होंने कहा कि ममता दीदी कह रही हैं बंगाल में खेला होबे। वह सही कह रही हैं। खेला होबे... निश्चित होबे... अब तो बंगाल में बोड़ो खेला होबे। ऐई खेला विकास का होबे, शांति का होबे।

भाजपा जहां 'खेला होबे' नारे को लेकर तृणमूल को ही चुनौती दे रही है तो वहीं तृणमूल ने इस शीर्षक के साथ पूरा एक गीत ही तैयार कर दिया है और इस गीत की धुन में तृणमूल के एक विधायक का नाचते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

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बंगाल में नारे ही नारे

तृणमूल के खेला होबे नारे के अलावा 'जय बांग्ला' पर भी विवाद है। भाजपा का कहना है कि तृणमूल का 'जय बांग्ला' नारा बांग्लादेश से प्रेरित है। हालांकि, तृणमूल सांसद और ममता दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने 'सोनार बांग्ला' के नारे पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा का अपना नारा 'सोनार बांग्ला' पड़ोसी मुल्क के राष्ट्रगान का हिस्सा है।

एक और नारा है जो सबसे ज्यादा विवादों में रहा और बार-बार ममता दीदी से सवाल से पूछा गया कि आखिर उन्हें इस नारे से क्या दिक्कत है ? हम बात 'जय श्री राम' के नारे की कर रहे हैं। लेकिन इस नारे की एवज में तृणमूल ने अपना नारा दे दिया... 'हरे कृष्ण हरे राम, विदा हो बीजेपी-वाम' । 

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इसके अलावा भाजपा मतदाताओं को लुभाने के लिए 'चुपचाप कमल छाप' का नारा लगा रही है। यह नारा ममता बनर्जी के पुराने नारे से प्रेरित बताया जाता है। बंगाल से वाम सत्ता को उखाड़ फेंकने की कसम खाने वाली ममता बनर्जी ने 'चुपचाप फूल छाप' का नारा दिया था। दरअसल, बहुत से मतदाता ऐसे होते हैं जो खुले आम किसी पार्टी का समर्थक नहीं बनना चाहते हैं और वह न ही किसी को इसके बारे में ऐसे बताते हैं। वहीं भाजपा द्वारा यह कहा जा रहा है कि जो लोग खुले आम ममता का विरोध नहीं करना चाहते हैं वह चुपचाप भाजपा का बटन दवाएं। उल्लेखनीय है कि बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में अभी नारो का शोर तो नहीं थमने वाला लेकिन नए-नए नारे जरूर सुनाई देंगे।

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