बंगाल में TMC को बड़ा झटका? 6 विधायकों संग Suvendu Adhikari की बैठक में सांसद Kakoli Ghosh

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 26, 2026

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही उथल-पुथल को और बढ़ाने वाले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार, छह विधायकों के साथ मंगलवार को कल्याणी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। तृणमूल कांग्रेस में अपने साथ हुए व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करने के बाद हाल में संगठनात्मक पद से इस्तीफा देने वाली दस्तीदार, भाजपा सरकार के आधिकारिक मंच पर ऐसे समय में नजर आईं, जब पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं।

इससे पहले, संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किए जाने के बाद, दस्तीदार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, ‘‘1976 से जुड़ाव, 1984 में शुरू हुई यात्रा। आज मुझे चार दशकों की निष्ठा का फल मिला है।’’ इस सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष को लेकर अटकलें तेज कर दीं, जिससे मुख्यमंत्री की बैठक में उनकी उपस्थिति तुरंत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गई। हालांकि, दस्तीदार ने अटकलों को तवज्जो नहीं देने की कोशिश की। उन्होंने संक्षेप में कहा, ‘‘प्रशासन सभी का है।’’ बैठक में उपस्थित तृणमूल विधायकों ने भी यही कहा कि वे केवल विकास संबंधी चिंताओं को लेकर आए हैं। बीना मंडल ने कहा, ‘‘मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए आई हूं। हमारे कुल छह विधायक बैठक में शामिल हुए हैं।’’ अब्दुल मतीन ने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने हमें आमंत्रित किया था, इसलिए मैं बतौर विधायक आया हूं।’’

अनीसुर रहमान बिश्वास ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में कई पिछड़े क्षेत्र हैं और समग्र विकास के लिए सरकार के सहयोग की आवश्यकता है। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने इस बैठक को पश्चिम बंगाल की पुरानी राजनीतिक संस्कृति से बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम विपक्ष में थे, हमें प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जाता था। हमने तय किया कि विधायकों को आमंत्रित किया जाएगा।

बारासात की सांसद ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। बसीरहाट के कई विपक्षी विधायक भी यहां शामिल हुए। हमने उनमें से एक को बोलने का अवसर भी दिया।’’ दिलचस्प बात यह है कि इस घटनाक्रम को तृणमूल के भीतर से भी समर्थन मिला। पार्टी विधायक ऋतब्रत बनर्जी, जिन्होंने हाल ही में पार्टी नेतृत्व के एक वर्ग की आलोचना की थी, ने तृणमूल सांसदों और विधायकों की भागीदारी का स्वागत किया और इसे एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 15 वर्षों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

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