By अभिनय आकाश | May 03, 2024
अमेरिकन राष्ट्रपति जो बाइडेन एक बार फिर भारत विरोधी बयान देने की वजह से सुर्खियों में हैं। अक्सर दूसरे देशों के मामले में दखल देने वाले बाइडेन ने इस बार भारत को एक जेनोफोबिक देश कहा है। आपको बता दें कि जेनोफोबिया से ग्रसित उन्हें कहा जाता है जो अजनबियों से डरते हैं या बाहरी अपचरित व्यक्तियों से नफरत करते हैं। यानी बाइडेन ने भारत को एक ऐसा देश कहा है जो दूसरे देशों के लोगों से नफरत करता है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब इस पर व्हाइट हाउस की तरफ से बयान भी सामने आ गया है। व्हाइट हाउस ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की 'ज़ेनोफोबिक' टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि उन्होंने एक व्यापक बिंदु पर टिप्पणी की थी कि देश में अप्रवासियों का होना कितना जरूरी है और कैसे इनके कारण हमारा देश मजबूत बनता है। वह इस बारे में बात कर रहे थे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे ने जोर देकर कहा कि अमेरिका के सहयोगी और साझेदार अच्छी तरह से जानते हैं कि बिडेन उनका कितना सम्मान करते हैं।
इससे ठीक उलट बाइडेन ने प्रवासियों के मुद्दे पर अधिक मानवीय रुख की वकालत की है। सत्ता में आने के बाद से बाइडेन ने प्रवासियों पर ट्रम्प-युग की कार्रवाई को कम कर दिया है और नई पैरोल नीतियां पेश की हैं, जो कुछ प्रवासियों को मानवीय कारणों से कानूनी रूप से प्रवेश करने की अनुमति देती हैं। हालाँकि, शोध से पता चलता है कि बाइडेन को बेरोजगारी और आप्रवासन को लेकर मतदाताओं की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एपी-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि आधे से अधिक अमेरिकी वयस्क सोचते हैं कि बाइडेन के राष्ट्रपति पद ने देश को रहने और आप्रवासन की लागत पर नुकसान पहुंचाया है।