Oman ने ऐसा क्या कर दिया? इसलिए ईरान ने होर्मुज में जहाज ठोक दिया

By अभिनय आकाश | Jun 27, 2026

मिडिल ईस्ट में युद्ध भले फिलहाल थम गया हो लेकिन दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफ लाइन एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। इस बार विवाद किसी सैन्य हमले का नहीं बल्कि जहाजों के लिए बनाए गए नए ट्रांजिट रूट का है। ईरान ने साफ-साफ चेतावनी दी है कि उसकी मंजूरी के बिना हुरमुज में कोई नया समुद्री रास्ता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि वैश्विक शिपिंग और तेल बाजार की नजरें फिर इस क्षेत्र पर टिक गई हैं। दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते के बाद होर्मुज स्टेट को दोबारा खोला गया था। लेकिन युद्ध के दौरान जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए ओमान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन आईएमओ के सहयोग से अपने तटीय क्षेत्र से गुजरने वाला एक नया ट्रांजिट रूट तैयार किया। इसका उद्देश्य जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना था ताकि किसी संभावित सैन्य खतरे से बचा जा सके। 

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स्टेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम जलमार्ग है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति भी काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान का दावा है कि हुरमुच पर उसका प्राकृतिक और रणनीतिक अधिकार है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि तेरान भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या टोल जैसी व्यवस्था चाहता है। दूसरी तरफ ओमान और कई पश्चिमी देश खुरमुच को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं। जहां किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो सकता। अगर सैन्य क्षमता की बात करें तो ईरान इस क्षेत्र में कहीं ज्यादा ताकतवर माना जाता है। उसके पास बड़ी संख्या में सक्रिय सैनिक, बैलेस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और एंटीशिप मिसाइलें हैं। जिनके जरिए वह होर्मुज में समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वहीं ओमान की सेना अपेक्षाकृत छोटी है और उसका मुख्य फोकस अपनी सीमाओं की सुरक्षा पर रहता है। हालांकि ओमान, अमेरिका, ब्रिटेन और खारी सहयोग परिषद जीसी के देशों का करीबी साझेदार है। इसलिए किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया। हाल ही में ईरान और ओमान ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है। 

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