दिल्ली-लखनऊ के बीच ये चल क्या रहा है? महाकुंभ के बहाने अखिलेश ने फिर साधा योगी सरकार पर निशाना

By अंकित सिंह | Feb 20, 2025

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्रिवेणी संगम के पानी में मल संदूषण पर चिंताओं को खारिज करने के एक दिन बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने वास्तविक प्रदूषण की खबर को जनता से दूर रखने के लिए एक कथित साजिश की ओर इशारा किया। यादव ने बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) के संबंध में नदियों की पानी की गुणवत्ता के बारे में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट पर एक समाचार खंड पोस्ट करने के लिए अपने एक्स प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। 

उन्होंने कहा कि लखनऊ के लोगों का आशय यह था कि 'प्रदूषित पानी' की खबरों को फैलने से रोकने के लिए मीडिया पर नियंत्रण हो। जनता पूछ रही है कि क्या 'अदालत की अवमानना' की तरह 'सरकारी बोर्ड या अथॉरिटी की अवमानना' के लिए भी किसी के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है? कल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा के पटल पर बोलते हुए कहा कि त्रिवेणी संगम नोज पर पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी और शुद्धिकरण प्रक्रियाएं की जाती हैं, जहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों से मिलती है।

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अखिलेश ने लिखा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को जब बताया तब ये समाचार प्रकाश में आया कि प्रयागराज में गंगा जी का ‘जल मल संक्रमित’ है। लखनऊ में सदन के पटल पर इस रिपोर्ट को झूठ साबित करते हुए कहा गया कि सब कुछ ‘नियंत्रण’ में है। दरअसल लखनऊवालों का मतलब था ‘प्रदूषित पानी’ के समाचार को फैलने से रोकने के लिए मीडिया पर नियंत्रण है। जनता पूछ रही है कि ‘न्यायालय की अवमानना’ की तरह किसी पर ‘सरकारी बोर्ड या प्राधिकरण की अवमानना’ का मुक़दमा हो सकता है क्या? यूपीवाले पूछ रहे हैं : दिल्ली-लखनऊ के बीच ये चल क्या रहा है?

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