By अंकित सिंह | Sep 16, 2024
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की रिहाई से जम्मू-कश्मीर और हरियाणा विधानसभा चुनावों पर पड़ने वाले असर और सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के घर जाकर पीएम मोदी की ओर से गणेश पूजा करने से उठे विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। नीरज दुबे ने कहा कि इन दोनों ही नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद जाहिर सी बात है कि दोनों से संबंधित पार्टियों को फायदा तो होगा ही। हालांकि केजरीवाल और राशिद इंजीनियर की जमानत से राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। राशिद इंजीनियर की बात करें तो वह फिलहाल सांसद हैं। उन पर टेरर फंडिंग के आरोप लगे हैं। वह पहले भी विधायक रह चुके हैं। जेल में रहते हुए वह लोकसभा चुनाव के दौरान अपना नामांकन किया था और जीत हासिल की थी। उन्होंने उमर अब्दुल्ला जैसे बड़े नेता को हरा दिया था। ऐसे में इंजीनियर रशीद के प्रभाव का पता लगाया जा सकता है।
अरविंद केजरीवाल को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि हरियाणा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को एक संजीवनी मिली है। आम आदमी पार्टी हरियाणा में लगातार मेहनत कर रही है। आम आदमी पार्टी हरियाणा में अरविंद केजरीवाल को उसका बेटा बता रही है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल के जमानत पार्टी के लिए कहीं ना कहीं फायदेमंद साबित हो सकती है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सका है। इतना ही नहीं, अरविंद केजरीवाल की रिहाई के बाद से आम आदमी पार्टी को देश के अलग-अलग राज्यों में भी मजबूती मिलेगी। कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। नीरज दुबे ने कहा कि भाजपा के लिए हरियाणा में इस बार चुनौतियां बहुत है। इसलिए भाजपा की टेंशन बढ़ी हुई है। हालांकि भाजपा के लिए राहत यह है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी वहां मजबूती से चुनाव लड़ रही है। केजरीवाल वहां प्रचार करेंगे। ऐसे में कांग्रेस के वोट बैंक में डैमेज वह जरूर करेंगे।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के घर जाकर पीएम मोदी ने पूजा की। हालांकि, इसपर विवाद शुरू हो गया। पूरे घटनाक्रम पर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि इसमें जो लोग विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं वह सामाजिकता को नहीं समझते हैं। किसी खास उद्देश्य से कोई नहीं मुलाकात करता है। हमारे देश के चीफ जस्टिस महाराष्ट्र से आते हैं, वहां गणेश पूजा महोत्सव होता है। ऐसे में हमारे संस्कृति का यह हिस्सा है। इसलिए प्रधानमंत्री वहां पहुंचे थे। कई बार ऐसे उदाहरण हमारे सामने आए हैं कि प्रोटोकॉल तोड़कर कई बार लोग एक दूसरे से मिलते रहे हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इस फालतू का मुद्दा बनाया जा रहा है।