आर्टिफिशियल रेन क्या है? जानें कैसे होती है क्लाउड सीडिंग और कृत्रिम बारिश

By Ankit Jaiswal | Oct 28, 2025

कृत्रिम वर्षा, जिसे आर्टिफिशियल रेन भी कहा जाता है, एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें बादलों की भौतिक अवस्था में आर्टिफिशियल बदलाव करके वातावरण को बारिश के अनुकूल बनाया जाता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया को क्लाउड सीडिंग कहा जाता है और यह तीन प्रमुख चरणों में पूरी होती है।

दूसरे चरण में बादलों के भार को और बढ़ाने के लिए नमक, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सूखी बर्फ और कैल्शियम क्लोराइड जैसी चीजों का उपयोग किया जाता है। इससे बादल भारी होकर घने बन जाते हैं।

तीसरे और अंतिम चरण में, जब बादल पहले से मौजूद हों या मनुष्य द्वारा बनाए गए हों, तब सिल्वर आयोडाइड और सूखी बर्फ जैसे ठंडा करने वाले केमिकल्स का छिड़काव किया जाता है। इससे बादलों का घनत्व बढ़ जाता है और वे बर्फीले स्वरूप में बदलकर भारी हो जाते हैं, जिसके कारण वे बारिश के रूप में गिरते हैं। इस छिड़काव के लिए हवाई जहाज, रॉकेट्स या गुब्बारों का प्रयोग किया जाता है।

गौरतलब है कि कृत्रिम वर्षा का मुख्य उद्देश्य फसलों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना, सूखे की समस्या से निपटना और वायु प्रदूषण के स्तर को अस्थायी रूप से कम करना है। क्लाउड सीडिंग से बादलों में मौजूद नमी बर्फ या बूंदों के रूप में एकत्र होती है और जब ये भारी हो जाती हैं, तो जमीन पर गिरकर बारिश का रूप लेती हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, यह तकनीक दुनिया के कई देशों में प्रयोग की जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां प्राकृतिक वर्षा असंतुलित या कम होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि उचित वैज्ञानिक नियंत्रण और सही रसायनों के प्रयोग से कृत्रिम वर्षा से कृषि उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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