By नीरज कुमार दुबे | Aug 10, 2023
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि चीन के समक्ष बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है क्योंकि पहली बार वह Deflation का सामना कर रहा है। हमने यह भी जानना चाहा कि यह Deflation क्या है और इससे कैसे चीन के भविष्य के मंसूबों पर पानी फिर सकता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि चीन इस समय आर्थिक संकट का सामना कर रहा है जोकि तेजी से बढ़ने के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित ही चीन की अर्थव्यवस्था की जो तस्वीर इस समय दिख रही है उससे उसके विस्तारवादी एजेंडे को धक्का लग सकता है।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि चीन के फैक्ट्री-गेट कीमतों में जुलाई में गिरावट आई, क्योंकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बाजार में मांग को बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही है और बीजिंग पर अधिक प्रत्यक्ष नीति प्रोत्साहन को जारी करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि चिंता बढ़ रही है कि चीन कहीं जापान की तरह बहुत धीमी आर्थिक वृद्धि के युग में प्रवेश तो नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद पहली तिमाही में तेज शुरुआत के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में रिकवरी धीमी हो गई है क्योंकि देश और विदेश में मांग कमजोर हो गई है और अर्थव्यवस्था को समर्थन देने वाली कई नीतियां गतिविधि को बढ़ाने में विफल रहीं हैं।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि चीन का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) जुलाई में साल-दर-साल 0.3% गिर गया। उन्होंने कहा कि उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) में भी लगातार 10वें महीने गिरावट आई, जो 4.4% की गिरावट है और यह पूर्वानुमानित 4.1% की गिरावट से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन उपभोक्ता कीमतों में साल-दर-साल गिरावट दर्ज करने वाली पहली जी20 अर्थव्यवस्था है और यह कमजोरी चीन के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के बीच व्यापार पर असर के बारे में चिंताओं को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि जुलाई में चीन के निर्यात और आयात दोनों में गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि चीन का रियल एस्टेट सेक्टर और बैंकिंग क्षेत्र भी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि कम ब्याज दरों के बावजूद, चिंतित उपभोक्ता और कंपनियां पैसा खर्च करने या निवेश करने की बजाय नकदी जमा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अली बाबा कंपनी के मालिक के साथ चीन ने जो बर्ताव किया उससे चीन के उद्योगपतियों में भी चिंता देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि चीन के संदिग्ध रवैये के चलते बहुत से देश उसका निवेश नहीं ले रहे हैं, चीन में विदेशी निवेश लगभग बंद हो चुका है और कई बड़ी कंपनियां चीन को छोड़ चुकी हैं। उन्होंने कहा कि चीन जैसा सस्ता श्रम और बेहतर तकनीक अब कई एशियाई देशों में उपलब्ध है इसलिए लोग चीन को छोड़ रहे हैं जिसका नुकसान चीन को होना ही है।