By अभिनय आकाश | Jan 09, 2026
इमेजिन कीजिए कि आप एक घर में रहते हैं और आपका घर टूट रहा है। लेकिन आपको लगता है कि आपका घर टूट नहीं रहा बल्कि यह आपके खिलाफ साजिश है ताकि आपको ज्यादा पैसा कमाने से रोका जा सके। यही हाल अमेरिका के राष्ट्रपति का भी है। अमेरिका के राष्ट्रपति को लगता है जलवायु परिवर्तन तो हो ही नहीं रहा है। जलवायु परिवर्तन केवल एक दिखावा है जिसकी वजह से अमेरिकी लोगों की जॉब छीनी जा रही है। कि जिसकी वजह से अमेरिकी लोगों का रोजगार जा रहा है। तो ये एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम जो है अमेरिका के राष्ट्रपति की को की तरफ से देखने को मिलेगी और इसी वजह से इसी की तरफ आगे बढ़ते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 66 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस और ट्रीटीज ऐसी हैं जिनसे अपने आप को बाहर कर लिया है। जिसमें यूएनएफ ट्रिपल सी शामिल है जिसमें आपका इंटरनेशनल सोलर अलायंस शामिल है।
भारत और फ्रांस की साझा पहल पर अस्तित्व में अया इंटरनैशनल सोलर अलायंस (ISA) आन दुनिया ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला एक अहम अंतर-सरकारी संगठन बन चुका है। करीब एक दशक पहले बतौर परिकल्पन सामने आया यह गठबंधन संधि-आधारित है और इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करना है, ताकि स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊन सभी तक पहुंच सके। इंटरनैशनल सोलर अलायंस की पहले घोषण वर्ष 2015 में पेरिस में आयोजित जलवायु सम्मेलन COP21 के दौरान की गई थी। भरत के पीएम नरेन्द्र मोदी और उस समय प्रबंस के राष्ट्रपति फ्रांसिस ओलांद ने मिलकर इस पहल का ऐलान किया था।
सोलर एनर्जी को लेकर एकीकृत प्लैटफॉर्म इंटरनैशनल सोलर अलायस सोलर एनजीं के लिए एकीकृत वैश्विक प्लैटफॉर्म के रूप में काम करता है। इसकी वेबसाइट के अनुसार, यह अपने एनालिटिक्स और एडवोकेसी के जरिए सौर ऊर्जा से जुड़ी अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देता है।
2022 से 2025 के बीच अमेरिका से ISA को आर्थिक योगदान निला। अमेरिका के बाहर होने से जलवायु परिवर्तन और बीन एनर्जी के वैश्विक प्रयासों को यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक झटका जरूर माना जाएगा।
इंटरनैशनल सोलर अलायस भारत की तस कूटनीतिक रणनैति का अहम हिस्सा है. जिसके जरिए वह ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उज्जल रहा है।