महाराष्ट्र का करोड़ों रुपये का खिचड़ी घोटाला क्या है? आदित्य ठाकरे के करीबी की संपत्ति ED ने की अटैच

By अभिनय आकाश | Mar 28, 2024

कथित खिचड़ी घोटाला मामले में सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है। आरोपी सूरज चव्हाण की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई है। सूरज चव्हाण को आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी नेता के तौर पर जाना जाता है। इसलिए यह फुसफुसाहट शुरू हो गई है कि उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे मुश्किल में पड़ जाएंगे। कथित खिचड़ी घोटाला मामले में आरोपी सूरज चव्हाण की संपत्ति ईडी ने जब्त कर ली है। कोविड के दौरान बीएमसी खिचड़ी आवंटन घोटाला हुआ। मुंबई में आवासीय फ्लैट और जिला-रत्नागिरी में कृषि भूमि सहित 88.51 लाख रुपये की अचल संपत्ति अनंतिम रूप से कुर्क की गई है। उद्धव ठाकरे गुट के अमोल कीर्तिकर, संदीप राऊत के भाई संदीप राऊत से भी ईडी पूछताछ करने वाली है।

बीएमसी खिचड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की गई। मुंबई पुलिस की प्रारंभिक जांच के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की है। मुंबई के अग्रीपाड़ा पुलिस स्टेशन में आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। ईडी की जांच में पाया गया कि सूरज चव्हाण ने बीएमसी/एमसीजीएम द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों का उल्लंघन करते हुए मेसर्स फोर्स वन मल्टी सर्विसेज के पक्ष में कार्य आदेश प्राप्त करने में भूमिका निभाई। सूरज ने बीएमसी/एमसीजीएम को धोखा देकर और कम मात्रा में खिचड़ी पैकेट की आपूर्ति करके अपराध की आय से 1.35 करोड़ रुपये कमाए। सूरज चव्हाण को मिस फोर्स वन मल्टी सर्विसेज से सैलरी और लोन के नाम पर 1.35 करोड़ रुपये मिले।

उसी पैसे से मुंबई और रत्नागिरी में कुर्क की गई अचल संपत्ति को निजी नाम पर लेने का आरोप है।

 मनी लॉन्ड्रिंग में सूरज चव्हाण की गिरफ्तारी

17 जनवरी को इसी साल सूरज चव्हाण को मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सूरज फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने 15.03.2024 को विशेष पीएमएलए कोर्ट में सूरज चव्हाण के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। कथित घोटाला कोविड-19 महामारी के दौरान बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा प्रवासी श्रमिकों और बेघरों के बीच खिचड़ी वितरण में अनियमितता से संबंधित है। 

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क्या है करोड़ों रुपए का खिचड़ी घोटाला

एफआईआर में कहा गया है कि सामुदायिक रसोई पर चर्चा के लिए 9 अप्रैल, 2020 को बीएमसी के भायखला कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई थी। तय हुआ कि जो 5000 या इससे ज्यादा खाने के पैकेट तैयार कर सकेगा, उसे ठेका दिया जाएगा। तय हुआ कि इसका ठेका किसी धर्मार्थ संगठन या सामुदायिक रसोई वाले एनजीओ को दिया जाए। एक शर्त यह थी कि ठेकेदार के पास रसोई एवं स्वास्थ्य विभाग का प्रमाणपत्र होना चाहिए। हालाँकि, एफआईआर के अनुसार, आरोपी ने सभी मानदंडों का उल्लंघन किया। एफआईआर में कहा गया है कि वैष्णवी किचन/सह्याद्री रिफ्रेशमेंट और सुनील उर्फ ​​बाला कदम को ठेका दिया गया था, लेकिन उनके पास 5,000 से अधिक लोगों के लिए खिचड़ी बनाने के लिए रसोई उपलब्ध नहीं थी। पुलिस जांच में पता चला कि समझौते के तहत ठेकेदार को 300 ग्राम वजन के पैकेट तैयार करने थे, लेकिन आरोपी ने 100 ग्राम से 200 ग्राम वजन के खाद्य पार्सल सौंपे। उन्होंने काम का उपठेका भी दूसरों को दे दिया। 

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