क्या है बंगाल का नारदा स्टिंग केस और कौन-कौन हैं शामिल, मामले की सुनवाई से पहले ही SC जज ने खुद को क्यों किया अलग?

By अभिनय आकाश | Jun 22, 2021

ये 17 मई की बात है यही कोई करीब एक महीने पहले जब केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं के यहां छापा मारा। इस छापेमारी में जांच एजेंसी ने ममता बनर्जी सरकार के दो मंत्रियों समेत टीएमसी के तीन बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। कोलकाता के निजाम पैलेस के चौदहवीं मंजिल पर सीबीआई का ऑफिस है। नेताओं की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीबीआई ऑफिस पहुंच गई। उन्होंने सीबीआई को चुनौती दते हुए कहा- मुझे गिरफ्तार करके दिखाओ। टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बड़े संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता निजाम पैलेस के बाहर जुटने लगे और देखते ही देखते वहां पत्थरबाजी भी शुरू हो गई। आखिर क्या हुआ था जो टीएमसी के बड़े नेताओं को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया था, ममता बनर्जी इस कार्रवाई के विरोध में क्यों इतनी मुखर दिखाईं दे रही थीं कि उन्हें खुद ही निजाम पैलेस आना पड़ा। इस मामले को लेकर आज क्यों चर्चा हो रही है। सारी चीजों को तफ्सील से बताएंगे। सबसे पहले आपको इसमें ताजा अपडेट के बारे में बताते हैं। 

दरअसल, दिल्ली से खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 24 को होगी। इस मामले की सुनवाई अब जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ करेगी। ये पूरा मामला नारदा स्टिंग से जुड़ा है जिसको लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने सीबीआई द्वारा 17 मई को तृणमूल कांग्रेस के चार नेताओं की गिरफ्तारी के दिन अपनी और प्रदेश के कानून मंत्री मलय घटक की भूमिका को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा हलफनामा दायर करने की इजाजत नहीं दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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क्या है नारदा स्टिंग 

साल 2016 की बात है पश्चिन बंगाल में चुनाव की तैयारियां जोरो पर थी। तमाम पार्टियां सत्ता पाने की लालसा लिए चुनावी समर में उतरने को कमर कस रही थी कि इसी बीच नारदा स्टिगं ऑपरेशन सामने आया। इस स्टिंग ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक सियासी सरगर्मी को तेज कर दिया। नारदा स्टिंग ऑपरेशन को मैथ्यू सैमुअल नाम के शख्स ने अंजाम दिया था। जिसके लिए उन्होंने नारदा न्यूज वेबसाइट बनाया। देखते ही देखते सियासी बवाल के बीच मामला कोलकाता हाईकोर्ट के दरवाजे पर पहुंचा। जहां से कोर्ट के आदेश पर साल 2017 में सीबीआई जांच के आदेश दिए गए। इस मामले टीएमसी सरकार के मंत्री फिरहाद हकीम, मंत्री सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी की गिरफ्तारी बीते दिनों हुई। 

कैसे दिया गया अंजाम

विभिन्न इंटरव्यू में दिए मैथ्यू सैमुअल के बयान के अनुसार वो खास तौर पर स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कोलकाता पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने तृणमूल के मंत्रियों और नेताओँ से संपर्क किया। अपना परिचय सैमुअल ने एक व्यापारी के तौर पर दिया और बंगाल में निवेश की बात कही। इसी दौरान लेन-देन की पेशकश भी की गई। रुपये लेते हुए तृणमूल के कई मंत्री और नेता मैथ्यू सैमुअल के हिडेन कैमरा में रिकॉर्ड हो गए। जो साल 2016 में ठीक बंगाल चुनाव से पहले सामने आया। इस स्टिंग को ममता बनर्जी ने साजिश करार दिया था। जबकि विपक्षियों को ममता के खिलाफ बड़ा हथियार मिल गया था। साल 2017 में कोलकाता हाई कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। नारदा स्टिंग ऑपरेशन वाले वीडियो में मुकुल रॉय, सुब्रत मुखर्जी, सुल्तान अहमद, शुभेंदु अधिकारी, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शोभन चटर्जी, मदन मित्र, इकबाल अहमद और फिरहाद हकीम शामिल थे। इसके अलावा एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एमएच अहमद मिर्जा को पैसे लेते हुए दिखाया गया। 

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नारदा स्टिंग ऑपरेशन में इनके खिलाफ केस

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से खूब कोशिश की गई कि ये मामला सीबीआई तक नहीं पहुंचे और इसे बीजेपी की साजिश माना जाए। लेकिन कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख उनके खिलाफ गया। इसके साथ ही मामले से ईडी भी जुड़ गई। ईडी ने सीबीआई की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर एक दर्जन नेताओं और एक आईपीएस समेत 14 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। ममता सरकार की तरफ से वीडियो को फर्जी करार देते हुए मैथ्यू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उनसे पूछताछ के लिए समन भी भेजा। लेकिन कोलकाता हाईकोर्ट से मैथ्यू को राहत मिली औऱ तो और फोरेंसिक जांच में वीडियो को सही पाया गया। 

वर्ष 2016 के चुनावों में बड़ा मुद्दा बना था नारदा घोटाला

वैसे 2016 के विधानसभा चुनाव में इसे ममता सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाया गया। लेकिन इसका खासा असर वोटरों पर नहीं पड़ता दिखा और ममता ने बंगाल की सत्ता में दोबारा वापसी की। इस बार के चुनाव में ये मुद्दा बंगाल की राजनीति से गायब रहा। लेकिन ममता की सियासी हैट्रिक के बाद एक बार फिर से सीबीआई ने नारदा घोटाले को चर्चा में ला दिया। 

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नवंबर 2020 में ईडी ने टीएमसी नेताओं को भेजा नोटिस

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के कई नेता सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच की रडार पर थे। नवंबर 2020 में ईडी ने नारद स्टिंग ऑपरेशन में पूछताछ के लिए तीन टीएमसी नेताओं को नोटिस भेजकर डॉक्युमेंट मांगे थे। इनमें मंत्री फरहाद हाकिम, हावड़ा सांसद प्रसून बंदोपाध्याय और पूर्व मंत्री मदन मित्रा की आय और व्यय का हिसाब मांगा गया था।

कैसे तेज हुई कार्रवाई

  • नवंबर 2020 में ईडी ने नारदा स्टिंग केस में पूछताछ के लिए तीन तृणमूल नेताओं को नोटिस भेजकर कागजात मांगे थे।
  • 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल के कई नेता सीबीआई की रडार पर आए। 
  • 10 मई को नारदा स्टिंग घोटाले में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के अनुरोध पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओँ के खिलाफ केस चलाने की अनुमति दी। राज्यपाल की ओर से संविधान के आर्टिकल 163 और 164 के तहत अधिकार का प्रयोग करते हुए अनुमति दी। 
  • 17 मई को सीबीआई ने नारदा घोटाले में फंसे ममता सरकार के मंत्री फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी सहित टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व भाजपा नेता सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया। 

सीबीआई दफ्तर पहुंची ममता

ममता बनर्जी टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ सीबीआई दफ्तर पहुंच गईं। उन्होंने सीबीआई नेताओं से कहा कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। उधर, टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सीबीआई दफ्तर के सामने नारेबाजी और पथराव किया। इसके बाद यहां सुरक्षाबलों को तैनात किया गया। उधर, भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, ममता बनर्जी राज्य में अराजकता फैला रही हैं। उन्होंने ममता के खिलाफ केस भी दर्ज कराया है। -अभिनय आकाश

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