By अभिनय आकाश | Oct 23, 2026
सोचिए, अगर एक रात में वह सब कुछ मिट जाए जिस पर आपकी पूरी जिंदगी टिकी है? बीती रात पूरी मानव सभ्यता के लिए एक खौफनाक चेतावनी थी। हमारा डिजिटल ऑक्सीजन यानी इंटरनेट खतरे में आ चुका है। आज की दुनिया में डाटा सिर्फ फाइल्स नहीं, इंसानी जिंदगी की बुनियादी जरूरत है। एआई के एक नए खुलासे ने पूरी दुनिया के पैरों तले से जमीन खिसका दी है। एक ऐसा लूपहोल सामने आया है जो आम इंसान से लेकर सुपरपावर्स तक के सारे बैंकिंग रिकॉर्ड्स और प्राइवेसी को शून्य बना सकता है। नतीजा? दुनिया भर की सरकारें और टेक जायंट्स बैकफुट पर हैं और अपनी ही वेबसाइट्स को लॉक करने पर मजबूर हो चुके हैं। दुनिया के कई देशों में सरकारी वेबसाइट बंद की जा रही है। कहीं वेबसाइट को ऑफलाइन किया जा रहा है तो कहीं उन्हें सेफ रखने के लिए जल्द से जल्द अपडेट पैच करने की तैयारी चल रही है। इसकी वजह कोई हैकर या किसी देश का साइबर अटैक नहीं बल्कि वेबसाइट बनाने में इस्तेमाल होने वाली एक टेक्नोलॉजी में मिली दो बड़ी कमियां हैं। इस टेक्नोलॉजी का नाम है पीएचपी। अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी यानी एनएसए ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने कहा है कि अगर किसी सिस्टम को तुरंत अपडेट नहीं किया जा सकता तो उसे कुछ समय के लिए ऑफलाइन करने पर विचार करना चाहिए। लेकिन पीएपी में ऐसा क्या हुआ कि दुनिया भर में हड़कंप मच गया। क्या हैकर्स सरकारी वेबसाइट से डाटा चुरा सकते हैं? भारत की वेबसाइट और आम लोगों की जानकारी पर इसका क्या असर पड़ सकता है? आज इसी का एमआरआई स्कैन करते हैं।
पीएचपी एक ऐसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसका इस्तेमाल वेबसाइट के पीछे होने वाले कामों को चलाने के लिए किया जाता है। जैसे C++ होती है, जावा होती है जो सर्वर पर चलती है और बैक एंड पर काम करती है और इसका काम है किसी भी वेबसाइट के डेटाबेस पर जाकर के वहां से इंफॉर्मेशनेशन जानकारी इकट्ठा करके आप तक पहुंचाना। मसलन जब आप किसी वेबसाइट पर लॉगिन करते हैं, कोई फॉर्म भरते हैं या अपना अकाउंट खोलते हैं तो ऐसे कई कामों में पीएचपी की भूमिका हो सकती है। जब आप किसी वेबसाइट पर लॉगिन करते हैं तो आपके यूजर आईडी और पासवर्ड को पीएपी वेबसाइट के डेटाबेस से ही मैच करता है। फिर उस वेबसाइट पर आपकी व्यक्तिगत जानकारी आपको दिखाता है। जैसे आपने कोई शॉपिंग वेबसाइट पे लॉग इन किया तो प्रीवियस ऑर्डर तभी दिखेगा। यह सब बैक एंड में हो रहा होता है। इसलिए पीएचपी से सीधे आपका कोई लेना देना होता नहीं। कोई राब्ता डायरेक्ट नहीं पड़ता है। अब पीएचपी एक फ्री और ओपन सोर्स लैंग्वेज है। यानी इसका कोई एक मालिक नहीं है। वर्डप्रेस जैसे प्लेटफार्म भी पीएचपी का इस्तेमाल करते हैं। यानी इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी वेबसाइट्स पर नहीं बल्कि न्यूज़ वेबसाइट, कंपनियों और दूसरी कई वेबसाइट में भी इसका इस्तेमाल होता है।
पीएचपी में दो ऐसी खामियां मिली हैं जिनका फायदा उठाकर हैकर्स किसी भी प्रभावित सर्वर में घुसपैठ करने की कोशिश कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिए किसी वेबसाइट का सर्वर एक ऐसे कंप्यूटर की तरह होता है जहां वेबसाइट से जुड़ी फाइलें और कई जरूरी जानकारियां रखी जाती हैं। अगर कोई हैकर इस सिस्टम की सुरक्षा में मिली खामी का फायदा उठा ले तो वह सर्वर पर अपना गलत कोड चला सकता है। इससे उसे वेबसाइट की फाइलों तक पहुंचने, जानकारी चुराने या वेबसाइट के कामकाज में गड़बड़ी करने का मौका मिल सकता है। कुछ मामलों में नुकसान और भी बड़ा हो सकता है। कुल मिलाकर अगर यह खामी है तो हैकर्स जो है वो पूरा वेबसाइट के बैक एंड का एक्सेस तक ले सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पीएचपी इस्तेमाल करने वाली हर वेबसाइट हैक हो गई है। खतरा उन वेबसाइट को है जिनके सर्वर में यह खामियां मौजूद हैं और जिन्हें अभी तक ठीक नहीं किया गया है।
जापान की पीएम सनाए ताकाइची ने साइबर एजेंसियों से अपनी वेबसाइटों की जांच करने और सुरक्षा पैच जारी होते ही उसे लगाने की तैयारी करने को कहा। आगाह किया कि अगर तुरंत अपडेट संभव न हो, तो वेबसाइट अस्थाई रूप से बंद करने पर विचार करें। जापान की एक क्लाउड सर्विस कंपनी ने भी अपनी सर्विसेज के कामकाज पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की। यूरोपीय संघ ने भी तत्काल कदम उठाने की सलाह दी है।
खतरा कितना बड़ा ?
इन खामियों की पहचान CVE-2026-109618 और CVE-2026-109619 के रूप में हुई है। इनसे हैकर कुछ परिस्थितियों में सर्वर पर खतरनाक कोड चला सकते हैं और जानकारी चुरा सकते हैं। सर्वर पर कब्जे से दूसरी सेवाएं भी खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर PHP वेबसाइट हैक हो गई है।
आखिर चिंता क्यों ?
PHP का इस्तेमाल WordPress, Drupal और Joomla जैसे प्लेटफॉर्म के अलावा वेबसाइटों पर लॉगिन, फॉर्म और डेटा संभालने में होता है। इसलिए सरकारी पोर्टल भी प्रभावित हो सकते हैं। PHP ने 21 अक्टूबर को सुरक्षा अपडेट जारी किए। वेबसाइट संचालकों को अपना वर्जन जांचकर जरूरी अपडेट करना चाहिए।