समय से जल्दी बड़ा होना बच्चों के लिए है खतरनाक, जानें क्या है प्रीकोशियस प्यूबर्टी के लक्षण और नुकसान

By प्रिया मिश्रा | Jan 28, 2022

आमतौर पर लड़कियों के शरीर में बदलाव शुरू होने का समय होता है 8 से 10 साल। वहीं, लड़कों में 9-12 साल की उम्र से बदलाव दिखने शुरू ही जाते हैं. लेकिन अगर लड़कियों में 8 साल की उम्र से पहले और लड़कों में 9 साल की उम्र से पहले शरीर में बदलाव नजर आए तो यह प्रीकोशियस प्यूबर्टी के लक्षण होते हैं. ऐसे में आपको एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए। क्योंकि प्रीकोशियस प्यूबर्टी से बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँच सकता है

प्रीकोशियस प्यूबर्टी एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का शरीर बहुत जल्दी वयस्कता में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे के शरीर में सामान्य से जल्दी यौवन के लक्षण दिखने लगते हैं। जब लड़कियों में 8 साल की उम्र से पहले और लड़कों में 9 साल की उम्र से पहले ही शारीरिक बदलाव शुरू हो जाता है तो उसे प्रीकोशियस प्यूबर्टी कहते हैं। असामयिक यौवन में लड़कियों के शरीर के आकार में परिवर्तन होने लगता है और उसकी प्रजनन क्षमता विकसित होने लगती है। प्रीकोशियस प्यूबर्टी में बच्चे की हड्डियों और मांसपेशियों मजबूत होने लगती हैं, जिसके बाद उसका विकास रुक जाता है। यह माता-पिता के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि प्रीकोशियस प्यूबर्टी वाले बच्चों का शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है और ऐसे बच्चों का इलाज नहीं किया जा सकता है।

प्रीकोशियस प्यूबर्टी के कारण

प्रीकोशियस प्यूबर्टी के कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल विका,र संक्रमण, ट्यूमर, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की समस्याएं, बीमारी का पारिवारिक इतिहास आदि।

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प्रीकोशियस प्यूबर्टी के लक्षण

हड्डियों और मांसपेशियों का तेजी से विकास

लड़कियों में स्तन का विकास और समय से पहले मासिक धर्म

लड़कों में अंडकोष, लिंग और चेहरे के बालों का बढ़ना

बगल में बाल आना

मुंहासे

आवाज का भारी होना


प्रीकोशियस प्यूबर्टी से बच्चों को नुकसान

कम उम्र में शरीर में हो रहे परिवर्तनों के लिए बच्चे तैयार नहीं होते हैं। इससे उनके भीतर हीन भावना पैदा होने लगती है और मैं खुद को दूसरों से दूर करने लगते हैं।

प्रीकोशियस प्यूबर्टी के कारण बच्चों के शरीर का विकास रुक जाता है। इससे उनकी हाइट का बढ़ना रुक जाता है और हाइट कम रह जाती है।

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कम उम्र में पीरियड शुरू होने पर लड़कियां मेंटली तैयार नहीं होती है जिसके कारण उन्हें तनाव हो सकता है। इसके साथ ही कम उम्र में लड़कियां अपने हाइजीन का ख्याल नहीं रख पाती है जिसके कारण उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

असामयिक यौवन के कारण लड़के और लड़कियों में अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षण शुरू हो सकता है। ऐसे में समझदारी कम होने पर बच्चे शारीरिक संबंध और यौन अपराध जैसे गलत कदम भी उठा सकते हैं।

प्रीकोशियस प्यूबर्टी स्थिति के कारण लड़कियों में ब्रेस्ट कैंसर, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम और प्रजनन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

- प्रिया मिश्रा 

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