लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस ने पूरी तरह कस ली है कमर

By गौतम मोरारका | Jan 29, 2023

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों के लिए भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस पूरी तरह कमर कस चुकी हैं। दोनों ही पार्टियां अपनी चुनावी तैयारी में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहतीं। जहां तक भाजपा की बात है तो आपको बता दें कि हाल ही में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई जिसमें आगामी चुनावों के लिए रणनीति बनाई गई। बीजेपी का प्रयास है कि 2023 की शुरुआत जीत के साथ की जाए। पार्टी जिस तरह त्रिपुरा में सत्ता बरकरार रखने के अलावा नागालैण्ड और मेघालय में अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए मेहनत कर रही है, वह दर्शाता है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक भी चुनाव नहीं हारने का जो संकल्प लिया था उसे सिद्ध करने की दिशा में काम भी हो रहा है।

दूसरी ओर, भारत जोड़ो यात्रा के समापन के बाद कांग्रेस भी अपनी चुनावी तैयारियों में पूरी तरह जुटने वाली है। कांग्रेस का राष्ट्रीय महाधिवेशन इस बार फरवरी माह में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में जहां कांग्रेस आगामी चुनावों की रणनीति बनायेगी वहीं सरकार को घेरने की भी विस्तृत योजना बनेगी। इस महाधिवेशन के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खडगे कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम का ऐलान भी करेंगे और पार्टी नेताओं को नये सिरे से जिम्मेदारियां दी जायेंगी।

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कांग्रेस का यह तीन दिवसीय महाधिवेशन 24, 25 और 26 फरवरी को रायपुर में आयोजित होगा। अधिवेशन में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव सहित इस साल राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा होगी। इसके अलावा इस अधिवेशन में देश भर में चल रहे 'हाथ से हाथ जोड़ो' अभियान की भी समीक्षा होगी। इस साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान काफी महत्वपूर्ण हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी थी लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार बीच में ही गिर गयी थी। कांग्रेस का प्रयास इन तीनों राज्यों की सत्ता हासिल करना है क्योंकि उत्तर भारत के यह तीनों राज्य राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं। हम आपको यह भी बता दें कि कांग्रेस ने पिछले साल राजस्थान के उदयपुर में चिंतन शिविर भी आयोजित किया था लेकिन उससे कुछ हासिल नहीं हो सका था, ऐसे में देखना होगा कि राष्ट्रीय अधिवेशन पार्टी के लिए कितना सार्थक रहता है।

-गौतम मोरारका

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