Prabhasakshi NewsRoom: नफरत की राजनीति या युद्ध की तैयारी? “दो विचारधाराओं की लड़ाई” कहकर क्या संदेश दे रहे हैं आसिम मुनीर?

By नीरज कुमार दुबे | May 11, 2026

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मुनीर के भाषण लगातार ऐसी विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाली सोच को बढ़ावा दे रहे हैं, जो भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी को और गहरा करती है। खास बात यह है कि पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले मुनीर ने जो भाषण दिया था और अब भारत-पाक संघर्ष के एक साल पूरा होने के अवसर पर जो भाषण दिया है, उनमें एक समान विचारधारा साफ दिखाई देती है।

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मुनीर का यह बयान उस समय आया है जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरा होने पर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराया है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ढांचे उसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं और देश अपनी सुरक्षा तथा आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा।

हम आपको बता दें कि विशेषज्ञों और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले आसिम मुनीर द्वारा दिया गया भाषण इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला साबित हुआ था। 17 अप्रैल 2025 को इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए मुनीर ने खुलकर कहा था कि मुसलमान और हिंदू “दो अलग राष्ट्र” हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों समुदाय धर्म, परंपराओं, रीति रिवाजों और सोच के स्तर पर पूरी तरह अलग हैं और यही “दो राष्ट्र सिद्धांत” की बुनियाद है।

अपने उसी भाषण में मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की “शहरग” यानि गले की नस बताया था और कहा था कि पाकिस्तान कभी भी कश्मीरियों को “भारतीय कब्जे” के खिलाफ उनके संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेगा। उनके इस बयान को कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी अत्यंत भड़काऊ और हिंदू विरोधी बताया था। भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की उत्तेजक भाषा ने आतंकवादी संगठनों को वैचारिक आधार और मनोबल दिया, जिसके बाद पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर हमला किया गया।

अब यदि अप्रैल 2025 के भाषण और रविवार को दिए गए भाषण की तुलना की जाए तो दोनों में एक स्पष्ट समानता दिखाई देती है। अप्रैल वाले भाषण में मुनीर ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच स्थायी वैचारिक विभाजन को रेखांकित किया था, जबकि अब उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संघर्ष को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताया है। दोनों ही मौकों पर उन्होंने धार्मिक और वैचारिक पहचान को संघर्ष का आधार बनाने की कोशिश की। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की भाषा शांति और संवाद की संभावनाओं को कमजोर करती है तथा कट्टरता और नफरत को बढ़ावा देती है।

विश्लेषकों के अनुसार मुनीर की बयानबाजी केवल सैन्य या राजनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि वह पाकिस्तान में एक ऐसी सोच को मजबूत कर रही है जिसमें भारत विरोध और धार्मिक विभाजन को राष्ट्रीय पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यही कारण है कि उनके भाषणों को लेकर पाकिस्तान के भीतर और बाहर दोनों जगह चिंता जताई जा रही है।

इस बीच, पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा है कि वह “प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली टीम के एक साधारण कार्यकर्ता” हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और लोगों ने इसे पाकिस्तान की नागरिक सरकार पर सेना के बढ़ते प्रभुत्व का संकेत बताया।

हम आपको यह भी बता दें कि अपने भाषण में आसिम मुनीर ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध बहु आयामी होंगे और पाकिस्तान तकनीक, हथियारों तथा प्रशिक्षण के स्तर पर अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। उन्होंने नई पनडुब्बियों, रॉकेट सेना और लड़ाकू विमानों की खरीद का भी उल्लेख किया। हालांकि साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान शांति चाहता है और अपनी प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा।

उधर, भारत का कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां केवल सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हैं और उसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन जिस तरह पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की ओर से लगातार धार्मिक और वैचारिक विभाजन पर आधारित बयान दिए जा रहे हैं, उससे क्षेत्र में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस तरह की नफरत फैलाने वाली भाषा जारी रही तो दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और भरोसे का वातावरण बनाना और कठिन हो जाएगा।

बहरहाल, पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की सैन्य हिमाकत, आतंकवादी दुस्साहस या भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की गई, तो भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देने में कोई संकोच नहीं करेगा। पिछले वर्षों में भारत ने यह दिखाया है कि वह अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है और भविष्य में भी किसी भी खतरे को मिट्टी में मिलाने की पूरी ताकत और इच्छाशक्ति रखता है।

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