By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026
अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए ट्रंप सरकार का नया फैसला कितना बड़ा झटका है? क्या Infosys, TCS, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों का रास्ता अब लंबा हो जाएगा। क्या जिन लोगों का फर्म यानी कि पीईआरएम प्रोसेस अभी शुरू नहीं हुआ है उनका ग्रीन कार्ड प्रोसेस अटक सकता है?ट्रंप सरकार ने Infosys, Tata, विप्रो, HCL और कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियों को एक प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इसी प्रोग्राम से यह कंपनियां अपने एंप्लाइज का ग्रीन कार्ड प्रोसेस शुरू करती हैं। तो, क्या अमेरिका में काम कर रहे हर भारतीय का वीजा खतरे में है? तो जवाब है नहीं। पूरे मामले को गहराई से समझने के लिए पहले ग्रीन कार्ड को समझिए। मान लीजिए एक भारतीय इंजीनियर Infosys में काम करता है या किसी XYZ कंपनी में काम करता है और अमेरिका में पोस्टेड है। वह वहीं हमेशा के लिए बसना चाहता है। इसके लिए उसकी कंपनी को उसका ग्रीन कार्ड प्रोसेस शुरू करना होता है।
सस्पेंड की गई कंपनियां इस दौरान नए परम आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी। खबरों के मुताबिक इसका असर उनके पहले से पेंडिंग एप्लीकेशन पर भी पड़ सकता है। यानी जिन कर्मचारियों का मामला अभी परम तक पहुंचा ही नहीं उनका प्रोसेस रुक सकता है या लटक सकता है। वे अपनी प्रायोरिटी डेट भी हासिल नहीं कर पाएंगे। अमेरिका हर साल एंप्लॉयमेंट बेस्ड यानी कि नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड की संख्या लिमिटेड रखता है। आवेदन करने वाले ज्यादा होते हैं इसलिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। प्रायोरिटी डेट तय करती है कि आप लाइन में कहां खड़े हैं।