By अभिनय आकाश | Jul 30, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले उस बिल पर प्रतिक्रिया दी, जिसे अमेरिकी सीनेट ने मंज़ूरी दे दी है। इस बिल की वजह से भारत और चार अन्य देशों पर 100% तक टैरिफ लगने का ख़तरा हो सकता है। ट्रंप ने इसमें बदलाव का सुझाव दिया है ताकि उन्हें ईरान पर टैरिफ लगाने के लिए व्यापक अधिकार मिल सकें। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किया गया प्रतिबंधों का बिल मंगलवार को आगे बढ़ा। इसका मकसद यूक्रेन पर हमले को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। गौरतलब है कि चीन के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है।
सीनेट में 86-12 के अंतर से एक अहम प्रक्रियात्मक वोट पास करने वाले इस बिल में रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। साथ ही, यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम की जा सके।
अमेरिका ने सबसे पहले अगस्त 2025 में रूस से एनर्जी (ऊर्जा) खरीदने के लिए भारत पर जुर्माना लगाया था। तब ट्रंप ने नई दिल्ली पर "पुतिन की जंग को बढ़ावा देने" का आरोप लगाते हुए 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। इससे भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया, जो चीन और ब्राज़ील पर लगाए गए टैरिफ के बराबर था। इस कदम से वॉशिंगटन और नई दिल्ली के रिश्तों में भी तनाव आ गया और व्यापार बातचीत रुक गई। हालांकि, फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव बढ़ गया क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ब्लॉक हो गया था। इससे एनर्जी संकट पैदा हुआ, जिसका असर भारत समेत दुनिया भर के देशों पर पड़ा। इसके जवाब में अमेरिका ने रूसी तेल पर छूट (waiver) दी, जिससे भारत फिर से तेल खरीद सका। इस छूट के बाद, जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' के डेटा से पता चला कि यह आयात €4.5 बिलियन का था और रूस की कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कमाई का लगभग 36% हिस्सा था।