By अभिनय आकाश | Jan 01, 2026
साल 2025 जब 1945 के बाद बनी दुनिया के नियम कायदों की धज्जियां उड़ी। अमेरिका ने तीन अलग-अलग महाद्वीपों में बम बरसाए कुल पांच देशों को निशाना बनाया। एशिया में यमन और ईरान, अफ्रीका में सोमालिया और नाइजीरिया और दक्षिण अमेरिका में वेनेजुएला। साल की शुरूआत में ही दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की गद्दी पर बैठने के बाद से ही ट्रंप ने अपने फैसलों से दुनिया को चौंकाया कम डराया ज्यादा है। लेकिन 2025 बीत चुका है औऱ 2026 का आगमन हुआ है। इस साल भी अमेरिकी राष्ट्रपति कि तरफ से कुछ हैरान करने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं क्योंकि साल जरूर बदला है लेकिन ट्रंप वही है। ट्रंप के लिए नए साल के व्हाट टू डू लिस्ट में रूस यूक्रेन के बीच युद्ध विराम, वेनेजुएला पर कब्जा, ईरान में तख्तापलट सबसे अहम है। लेकिन उससे भी जरूरी नोबेल शांति पुरस्कार पाना है। अमेरिका ने तीन अलग-अलग महाद्वीपों में बम बरसाए कुल पांच देशों को निशाना बनाया। एशिया में यमन और ईरान, अफ्रीका में सोमालिया और नाइजीरिया और दक्षिण अमेरिका में वेनेजुएला।
ट्रंप 4 साल से चले आ रहे इस युद्ध का क्विक फिक्स यानी सरल समाधान चाहते हैं। लेकिन ट्रंप की कोशिशें अभी तक असफल साबित हुई है। क्योंकि इस युद्ध विराम में दोनों पक्षों ने जो शर्तें रखी हैं वो काफी जटिल है। यूक्रेन ने ट्रंप से 15 साल की सिक्योरिटी गारंटी मांगी है। ट्रंप इस पर राजी हो गए। लेकिन रूस चाहता है कि अभी जिन इलाकों पर उसका कब्जा है वह बरकरार रहे। जिस पर जेलस्की राजी नहीं है। ट्रंप की इस डील को पीस यानी शांति से ज्यादा पावर बैलेंस माना जा रहा है। यही वजह है कि युद्ध विराम नहीं हो पा रहा है। ट्रंप कह रहे हैं कि युद्ध विराम की डील 95% तक हो गई है। लेकिन बाकी का 5% साल 2026 में उनका मुख्य एजेंडा होगा। जिस हिसाब से रूस और यूक्रेन के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। ट्रंप मेक अमेरिका ग्रेट अगेन वाली पॉलिसी को आगे बढ़ा रहे हैं। हालांकि ट्रंप के लिए कोई भी नीति स्थाई नहीं है। ट्रंप अपने यूटर्न के लिए मशहूर है।
2026 में विदेशों में उनके प्रभाव के विकास का अनुमान लगाना आसान है। राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को एकतरफा रूप से उलट-पुलट कर, विदेशी सहायता रोककर और विदेशों में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के वाशिंगटन के प्रयासों को समाप्त करके विश्व में अमेरिका की भूमिका को बदलने के प्रयास से हुई। लक्ष्य अभी भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अमेरिका-केंद्रित द्विपक्षीय संबंधों के हब-एंड-स्पोक मॉडल में पुनर्गठित करना है, जिससे केवल अमेरिका को लाभ हो। अन्य सरकारों को संदेश स्पष्ट था: इस राह पर चलो, वरना परिणाम भुगतने होंगे। लेकिन ट्रंप के कई प्रयासों के अप्रत्याशित परिणाम निकले हैं। विशेष रूप से, उन्हें उम्मीद थी कि चीनी वस्तुओं का प्रभावी बहिष्कार आर्थिक रूप से कमजोर बीजिंग को अमेरिका के लिए अधिक अनुकूल व्यापार शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर देगा। इसके विपरीत, चीन ने दुर्लभ खनिजों पर प्रतिबंध लगा दिए, जो डिजिटल युग की उपभोक्ता और सैन्य प्रौद्योगिकियों की एक विशाल श्रृंखला के लिए आवश्यक घटक हैं। इस कदम ने राष्ट्रपति ट्रंप को पीछे हटने और अमेरिकी निर्मित सेमीकंडक्टर और अन्य प्रौद्योगिकियों तक चीनी पहुंच के रूप में रियायतें देने के लिए मजबूर कर दिया - एक ऐसा कदम जिसे ट्रंप और उनसे पहले राष्ट्रपति बाइडेन प्रतिबंधित करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहे हैं।
2025 वैश्विक मंच पर ट्रंप की एकतरफा नीतियों का चरम था। दुनिया ट्रंप को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले रही थी, लेकिन वह स्टेट्समैन कम और रीयल एस्टेट सेल्समैन ज्यादा हैं। उन्होंने धमकी तो बेहद ऊंचे टैरिफ की दी, मगर सौदेबाजी करते हुए इसे कम करते गए। इसके अलावा रेयर अर्थ पर चीन की मजबूत पकड़ के चलते ट्रंप उसके साथ सख्ती नहीं बरत सके। 2026 में चुनाव के दौरान हासिल किए गए अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनकी विदेश नीति की रणनीति में अन्य सरकारों का अधिक समर्थन आवश्यक होगा। इसमें निश्चित रूप से नकारात्मक पहलू भी हैं। जैसे-जैसे राष्ट्रपति अपनी शक्ति पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों से निराश होते जाएंगे, वे ऐसे क्षेत्रों में हिंसक कार्रवाई कर सकते हैं जिससे उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है—उदाहरण के लिए, निकोलस मादुरो के वेनेजुएला के खिलाफ। वहां संभावित सत्ता परिवर्तन के बाद उत्पन्न होने वाली अराजकता से शरणार्थियों की नई लहरें क्षेत्र की सीमाओं को पार कर सकती हैं। नहीं, ट्रंप की एकतरफा विदेश नीति को बनाए रखने में असमर्थता उन्हें उदार अंतरराष्ट्रीयवादी बनने, अमेरिका और उसके गठबंधनों की अनिवार्यता की बात करने, अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा के साथ नया व्यापार समझौता करने, कार्बन-मुक्त ऊर्जा परिवर्तन में नेतृत्व करने या संयुक्त राष्ट्र को बकाया चुकाने के लिए मजबूर नहीं करेगी। लेकिन यह वह वर्ष होगा जब राष्ट्रपति के ट्रंप-निर्देशित वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था के सपने का पर्दाफाश होगा।