Chai Par Sameeksha: Sambhal हिंसा के दृश्यों ने भविष्य में क्या सावधानियां बरतने की सीख दी है?

By अंकित सिंह | Dec 02, 2024

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने संभल और अजमेर में चल रहे मामले, इसके अलावा महाराष्ट्र और झारखंड, तथा संसद में हो रहे हंगामें पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने संभल हिंसा को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि कोर्ट ने तमाम का कागजातों को देखने के बाद ही सर्वे का आदेश दिया होगा। सर्वे से क्या दिक्कत है, अदालत के आदेश को आप चुनौती दे सकते हैं। लेकिन सड़क पर आकर हिंसा करना ठीक नहीं है। कानून को अपना काम करने दीजिए। कानूनी तरीके से अगर प्रशासन कोई कार्यवाही करता है तो प्रशासन को रोकने के लिए पत्थर लेकर लोग क्यों सामने आ रहे हैं? यह वाकई में चिंता की बात है क्योंकि तमाम काम अदालत के आदेश पर हो रहे हैं।

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संसद सत्र को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों नहीं चाहते कि संसद चले। उन्होंने कहा कि जब से अडानी का मामला सामने आया, तभी से यह असार लगने लगे थे कि संसद का सत्र नहीं चल पाएगा। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात तो यह है कि जब संसद की कार्यवाही नहीं चल रही है तो ना इससे चिंतित सत्ता पक्ष है और ना विपक्ष। हंगामा होता है तो सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया जाता है। जब तक दोनों पक्षों के मन में यह नहीं आएगा कि हमें हर हाल में सदन को चलाना है, तब तक नहीं चल पाएगा। नीरज दुबे ने इस बात की आशंका जताई कि जैसे ही संसद सत्र के समाप्त होने में कुछ दिन बचे होंगे, हंगामे के बीच ही कई विधेयकों को पारित कर लिया जाएगा। जनता को इसके बारे में पता नहीं चलेगा। हमारे नेता आज तक संसदीय लोकतंत्र को लेकर परिपक्व नहीं हो पाए हैं। लोकतंत्र के प्रति हमारे नेताओं को जिम्मेदार होना होगा। जनता ने बड़े भरोसे से आपको चुन के वहां भेजा है।

महाराष्ट्र और झारखंड को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि हेमंत सोरेन को लेकर जो पहले से तय था वही हुआ। लेकिन हेमंत सोरने ने कांग्रेस को आइना दिखा दिया है। कांग्रेस से हेमंत सोरेन की बात नहीं बन पा रही है। विभागों को लेकर भी बातचीत नहीं हो पा रही है। ऐसे में देखना होगा कि झारखंड में इंडिया गठबंधन में कितनी मजबूती आगे रहती है। नीरज दुबे ने कहा कि देखना होगा कि महाराष्ट्र की कमान किसे सौंपी जाती है। देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे अभी भी रेस में बने हुए हैं। सबकुछ अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में है। हालांकि नीरज दुबे ने इस बात को इनकार किया कि महायुती में कोई बड़ी टूट होगी। उन्होंने कहा कि सरकार 5 साल चलेगी। लेकिन कहीं ना कहीं देवेंद्र फडणवीस की आगे भूमिका और भी बड़ी हो सकती है। वह भाजपा के भविष्य के नेता है। ऐसे में उन्हें महाराष्ट्र में सीमित न रहकर देश में भी आना चाहिए। देवेंद्र फडणवीस राजनीतिक विरोधियों से अच्छा निपटते हैं। ऐसे में बीजेपी के पास उनकी उपयोगिता काफी ज्यादा है।

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