Chai Par Sameeksha: बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है उसको देखते हुए भारत को क्या सावधानी बरतनी चाहिए

By अंकित सिंह | Aug 12, 2024

प्रभासाक्षी समाचार नेटवर्क  के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह बांग्लादेश हिंसा, संसद मानसून सत्र और मनीष सिसोदिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि बांग्लादेश जैसी स्थिति कभी भारत में नहीं आये इसके लिए वोट बैंक की राजनीति से प्रभावित हुए बिना कार्य करने होंगे। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि हर विषय पर देश में राजनीति होने लगती है। लेकिन कोई भी देश हो, किसी भी देश में अगर अल्पसंख्यक हैं तो उसके सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार की है। बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है वह ठीक नहीं है और जाहिर सी बात है कि भारत इस पर पूरी नजर बनाए हुए रखा हुआ है।

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उन्होंने कहा कि जो प्रदर्शन आरक्षण के खिलाफ हो रहा था, वह शेख हसीना के हटते ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ कैसे होने लगा? उन्होंने कहा कि इसके पीछे गहरी साजिश है, कोई पुराना हिसाब चुकता करने की कोशिश कर रहा है और बांग्लादेश की कीमत इसकी चुकानी पड़ेगी। बांग्लादेश का जो विकास रफ्तार था, वह पूरी तरीके से ठप हो गया है। कई कंपनियां महान निवेश करने से कतरा रही है। कपड़ा उद्योग वहां बहुत बड़ा था। लेकिन अब उसे पर भी ब्रेक लग सकता है। बांग्लादेश ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। धर्म के नाम पर वहां युवाओं को बड़गलाने की कोशिश की गई है। 

प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ को नाहक ही विवाद में घसीटा कर गलत परम्परा कायम की है। साथ ही, इस बार संसद के मॉनसून सत्र के दौरान ऐसा कई बार देखने को मिला कि लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ से विपक्षी सदस्यों ने जानबूझकर उलझने का प्रयास किया। दोनों सदनों के सभापतियों पर विपक्ष ने तमाम तरह के आक्षेप लगाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाये। संभवतः ऐसा इसलिए किया गया ताकि आसन की निष्पक्षता को संदेह के कठघरे में खड़ा किया जा सके।

प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 17 महीने बाद जमानत मिलना आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस मामले में जेल में बंद हैं, ऐसे में पार्टी के दूसरे नंबर के बड़े नेता का बाहर आना निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) के काडर में नये उत्साह का संचार कर गया है। लेकिन यहां एक बात पर सभी को गौर करना होगा कि जमानत मिलने का अर्थ बरी हो जाना नहीं है। साथ ही शराब घोटाले में जिस प्रकार के गंभीर आरोप आम आदमी पार्टी के नेताओं पर लगे हैं उनसे उनके कट्टर ईमानदार होने के दावों पर तो प्रश्नचिन्ह खड़ा हो ही गया है। 

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