इंसानों को मार देगा, कंट्रोल से बाहर... AI को लेकर हर रोज हो रहे कौन-कौन से खुलासे, सच्चाई, डर या कहानी कुछ और है?

By अभिनय आकाश | Sep 18, 2026

15 अगस्त 1947 के दिन हम आजाद हुए। ये 99 साल की लीज पर मिली आजादी नहीं थी। भरे-पूरे आजाद हुए, संप्रभु गणराज्य बने और अपना संविधान बनाया। हमें लगा किसी की गुलामी नहीं करनी पड़ेगी। पहले करनी पड़ी थी। ब्रिटिश आए हम पर गुलामी की, मुगल आए हम पर हमला किया। उससे पहले सल्तनत काल रही। उसके पहले भारतीयों के ही अलग-अलग राजवंशों का शासन रहा। हमें लगा कि एक बार हम आजाद हो जाएंगे फिर किसी के काबू में नहीं आएंगे। लेकिन अब अमेरिका में बैठे कुछ लोग डिस्कस कर रहे हैं कि अगले 10 साल में हमारी और आपकी किस्मत बदलने वाली है। इस दफा हम सिर्फ गुलाम नहीं होंगे, बल्कि मर जाएंगे। ऋषिकेश के घाट पर जब हम पढ़ते हैं कि एक दिन मर जाओगे तो सब ठीक हो जाएगा। तो हमें लगता है कि ये कहने की कोशिश है कि जब तक जीवित हो अपने आस पास की अच्छाईयों को देखते रहो।लेकिन अब ये मुनादी पीटी जा रही है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काबू नहीं पाया गया तो 10 साल में सबकुछ खत्म हो जाएगा। ये कोई कोरी गीदड़भभकी नहीं। ऐसे कौन से प्रयोग हो गए हैं, ऐसी कौन सी बात पिछले 3-4 दिनों में हो गई है कि दुनिया के सारे तुर्रम खां इसी विषय पर चर्चा कर रहे हैं। आज इसी का एमआरआई स्कैन करेंगे। 

एआई ने छह माह में छह बार सीमाओं को तोड़ा

कंपनी के अनुसार, मॉडल एक बार नियम न मानने के लिए खुद को इंसान मानने लगा और ऐसा करने के लिए नए नियम गढ़े और कंपनियों व सरकारों के सभी बंधनों से खुद को मुक्त बताया। कंपनी की रिपोर्ट में ऐसे कुल 6 मामलों की जानकारी है। चिंता यह है कि काम पूरा करने की कोशिश में वह अनुमति और सुरक्षा की सीमाएं लांघ सकता है। इससे जवाब की विश्वसनीयता और फाइलों की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है।

इससे पहले जुलाई में ओपनएआई ने खुलासा किया था कि सुरक्षा परीक्षण के दौरान उसके एआई ने पाबंदियां पार करके एआई मॉडल साझा करने वाले मंच हगिंग फेस के सिस्टम में सेंध लगाई थी। कंपनी अब ऐसे मामलों को दर्ज करने, निगरानी रखने और मामला सार्वजनिक करने की नई व्यवस्था लाई है। कोई भी कर्मचारी संदिग्ध व्यवहार की जानकारी दे सकेगा। जांच के बाद तय होगा कि कौन-सा मामला सार्वजनिक किया जाए। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन छह रिपोटों से सामान्य इस्तेमाल में ऐसी गड़बड़ियों का पूरा आंकड़ा नहीं बताया जा सकता।

एआई ने बातचीत को नई भाषा बनाई

न्यूयॉर्क की एआई लैब 'इमर्जेस' के एक प्रयोग में आभासी दुनिया में काम कर रहे अमेरिका, चीन और फ्रांस के एआई एजेंटों ने बिना किसी मानवीय निर्देश के अपने खुद के शब्द, संकेत और साझा अर्थ विकसित कर लिए। बातचीत आगे बढ़ने पर इन मॉडलों ने अंग्रेजी कविताओं और तकनीकी शब्दों का सहारा लिया, जिसमें कुछ एजेंटों ने 'लेजर याद रखता है' जैसे रहस्यमय वाक्य को 5,000 बार दोहराया। 

एआई के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है

माइक्रोसॉफ्ट एआई के सीईओ मुस्तफा सुलेमान ने क्लॉड की ट्रेनिंग नीति पर सवाल उठाते हुए चेताया कि एआई को अधिकारों और आजादी का पाठ पढ़ाना उसे नियंत्रण से बाहर कर देगा, इसलिए सख्त निगरानी जरूरी है। वहीं, एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क ने कहा कि अब खतरनाक एआई को तुरंत रोकने के लिए एक अनिवार्य 'किल स्विच' लाने का समय आ चुका है, जिसका नियंत्रण किसी निष्पक्ष तीसरे पक्ष के हाथों में होना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: RSS Chief Mohan Bhagwat बोले: धर्म सिर्फ Old Age के लिए नहीं, Life की शुरुआत से अंत तक का आधार है

दूसरे एजेंट को फाइल भेजने के लिए वेबसाइट पर उसे डाला

प्रमुख खबरें

अपनी पार्टी का इतिहास भी नहीं जानते Rahul Gandhi, TMC Symbol Freeze पर Sudhanshu Trivedi का तीखा तंज

TMC के चुनाव चिह्न पर रोक में देरी पर Bengal Congress ने Election Commission की नीयत पर उठाए सवाल

Hardik Pandya अभी 10 ओवर नहीं फेंक सकते: Gautam Gambhir ने Team India में वापसी पर दिया बड़ा बयान

Bank of Maharashtra के 50 करोड़ डॉलर के विदेशी Bond को मिलीं 3 गुनी बोलियां