By अभिनय आकाश | Oct 24, 2026
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली पुलिस के उस नोटिस में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कहा गया था। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने बोरा की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) का यह कदम केवल सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि छह एफआईआर और विभिन्न घटनाओं की जनरल डायरी (GD) प्रविष्टियों जैसे ठोस रिकॉर्ड पर आधारित था। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट मजिस्ट्रेट की व्यक्तिपरक संतुष्टि की समीक्षा नहीं कर सकता, क्योंकि 17 अक्टूबर को जारी किया गया यह नोटिस पूरी तरह कानूनी मानकों के अनुरूप है। अदालत ने कहा जिस इलाके में याचिकाकर्ता को हिरासत में लिया गया था और जहां वह लोगों से अपने विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रही थीं, वहां शांति भंग होने की आशंका को लेकर एसईएम का यह मानना था कि वह एक व्यावसायिक इलाका है, जहां दफ्तर जाने वालों की भारी आवाजाही रहती है। साथ ही, वहां से कुछ महत्वपूर्ण सड़कें गुजरती हैं, जो शहर के मुख्य हिस्से को अन्य इलाकों से जोड़ती हैं। उसने कहा वहां बड़ी संख्या में होटल, बैंक, कार्यालय और विक्रेता हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 130 के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से पहले एसईएम के पास कोई सामग्री नहीं थी।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब पीस बॉन्ड भरने को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। नेहा से जब पत्रकारों के सवाल के जवाब में साफ कहा है कि वो किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं करेंगी और न ही किसी बॉन्ड पर हस्ताक्षर करेंगी। न्यूज एजेंसी एएनआई ने जब नेहा से पूछा कि क्या वह पीस बॉन्ड साइन करेंगी, क्या शर्तें हैं? इस पर नेहा ने साफ-साफ हमारी कोई शर्तें नहीं हैं। हम इस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने नहीं जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद भी नेहा अगर पीस बॉन्ड नहीं भरती हैं तो पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
21 अक्तूबर को जानकारी आई कि सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास की 7 दिन की रिमांड पूरी हुई और उसके बाद एसईएम कोर्ट में दोनों की पेशी होती है। वहां पर उन्हें बेल मिल जाती है। हालांकि पुलिस तीन दिन की कस्टडी और मांग रही थी। लेकिन कस्टडी नहीं मिलती है। आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ से बाहर आ गए। लेकिन उनके बाहर कदम रखते ही क्राइम ब्रांच की तरफ से दोनों को एक नोटिस मिलता है। इस मामले में दो केस चल रहे हैं और जिसमें आशुतोष रांका और सौरव दास पर दो एफआईआर है। ये मामला अब क्राइम ब्रांच ट्रांसफर हो गया है और इसी मामले को लेकर समन भेजा गया। अजिक्ये शिंदे सहित आशुतोष रांका और सौरव दास को क्राइम ब्रांच ने अपने रजौरी गार्डन वाले ऑफिस बुलाया।