मुसलमानों पर सबसे ज्यादा अत्याचार करने वाला तालिबान किस मुँह से मुस्लिमों के हितों की बात कर रहा है?

By नीरज कुमार दुबे | Sep 03, 2021

अफगानिस्तान की सत्ता पाने के नशे में चूर ताबिलान के नेता और प्रवक्ता कुछ भी कहे जा रहे हैं। इनके दावे इनके शौर्य का नहीं बल्कि इनकी बेवकूफियों का ज्यादा बखान कर रहे हैं। अब तालिबान ने कह दिया है कि उसे कश्मीर समेत हर कहीं मुस्लिमों के पक्ष में बोलने का अधिकार है। इस बयान पर किसी को भी हंसी आ जायेगी क्योंकि तालिबान को कश्मीर समेत कहीं भी मुस्लिमों के पक्ष में बोलने के अधिकार की बात कहने से पहले जरा अपने गिरेबां में झांक कर देखना चाहिए। अफगानिस्तान में तालिबान के डर से जो लोग देश छोड़कर भागे हैं वह ज्यादातर मुस्लिम ही थे, अफगानिस्तान में जो लोग हालिया संघर्षों में मारे गये हैं वह मुस्लिम ही थे। अफगानिस्तान में जिस आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकार छीने गये हैं वह मुस्लिम ही हैं। अफगानिस्तान में जो महिलाएं आज भय के साये में जीने को मजबूर हो गयी हैं वह मुस्लिम ही हैं। तालिबान राज में शरिया कानून का पालन नहीं करने वाले जिन लोगों की गर्दन उड़ा दी जाती है वह भी मुस्लिम हैं। अफगानिस्तान में तालिबान राज में जिन लोगों के समक्ष भूखों मरने की नौबत आ गयी है वह मुस्लिम ही हैं। अफगानिस्तान में जो लोग हिम्मत दिखाते हुए अपने मौलिक अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं वह मुस्लिम ही हैं। तालिबान राज में अफगानी मुद्रा का अवमूल्यन हो जाने से जो लोग आर्थिक रूप से बर्बाद हो गये हैं वह मुस्लिम ही हैं। तो जब खुद तालिबान के कुकर्मों के चलते मुसलमान परेशान हैं तो तालिबान किस मुंह से मुसलमानों के हित की बात कर रहा है। तालिबान और अन्य आतंकवादी संगठनों के कुकर्मों के कारण ही दुनिया भर में मुसलमानों की छवि खराब होती है।

जहां तक तालिबान के मुलसमानों की आवाज उठाने संबंधी बयान की बात है तो हम आपको बता दें कि दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने वीडियो लिंक के जरिए बीबीसी को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा है कि हम आवाज उठाएंगे और कहेंगे कि मुस्लिम आपके अपने लोग हैं, आपके अपने नागरिक और उन्हें आपके कानून के तहत समान अधिकार मिलने चाहिए। सुहैल शाहीन ने कहा कि मुस्लिम होने के नाते यह तालिबान का अधिकार है कि वह कश्मीर तथा किसी भी अन्य देश में रह रहे मुस्लिमों के लिए आवाज उठाए। अमेरिका के साथ दोहा समझौते की शर्तों का जिक्र करते हुए तालिबानी प्रवक्ता ने कहा है कि उनकी किसी भी देश के खिलाफ सशस्त्र अभियान करने की कोई नीति नहीं है।

लोकतांत्रिक अधिकारी छीनने के बाद मनोरंजन के अधिकार भी छीने

तालिबान एक ओर तो अफगानिस्तान में लोकप्रिय शासन देने की बात कह रहा है और दूसरी ओर वह आम लोगों को उनके मनोरंजन के साधनों से भी दूर करने में लगा हुआ है। अब अफगानिस्तान में लोग टीवी पर वही देख पाएंगे जो तालिबानी चाहेंगे। यही कारण है कि अफगानिस्तान के सबसे लोकप्रिय निजी टेलीविजन नेटवर्क ने अपने उत्तेजक तुर्किश धारावाहिकों और संगीत कार्यक्रमों के स्थान पर देश के नए तालिबानी शासकों के अनुरूप जानवरों से संबंधित कार्यक्रम दिखाना शुरू कर दिया है। दरअसल तालिबान ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि मीडिया इस्लामिक कानूनों के विरोधाभासी कार्यक्रम नहीं दिखाए या राष्ट्रीय हितों को नुकसान न पहुंचाए। हालांकि तालिबानी चेतावनी के बावजूद अफगानिस्तान में कुछ ऐसे स्वतंत्र समाचार स्टेशन हैं जो महिला एंकरों को दिखा रहे हैं और तालिबान ने मीडिया की आजादी की जो बात कही है, उसकी सीमाओं की परीक्षा ले रहे हैं। तोलो न्यूज के मालिकाना हक वाले मॉबी समूह के अध्यक्ष और सीईओ साद मोहसेनी ने कहा कि उनका मानना है कि तालिबान मीडिया को इसलिए बर्दाश्त कर रहा है क्योंकि वे मानते हैं कि उन्हें लोगों के दिल जीतने हैं और अपने शासन के प्रति उन्हें विश्वास दिलाना है। लेकिन अभी देखना होगा कि तालिबान की सरकार बनने के एकाध महीने बाद वह मीडिया के साथ क्या व्यवहार करते हैं। वैसे अपने समाचार और मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए पहचाने जाने वाले तोलो ने अपने संगीत कार्यक्रमों और धारावाहिकों को खुद से हटाने का फैसला किया है। अफगानिस्तान के सरकारी प्रसारणकर्ता आरटीए ने भी अगले नोटिस तक महिला प्रस्तोताओं को हटा दिया है। महिला द्वारा चलाए जा रहे स्वतंत्र जेन टीवी ने भी नए कार्यक्रमों को दिखाना बंद कर दिया है।

तालिबान की नई सरकार का चेहरा

अब बात करते हैं तालिबान सरकार की। तालिबान काबुल में ईरान की तर्ज पर नई सरकार के निर्माण की घोषणा करने वाला है। तालिबान के सबसे बड़े धार्मिक नेता 60 वर्षीय मुल्ला हेबतुल्ला अखुंदजादा को अफगानिस्तान का सर्वोच्च नेता बनाया जाएगा। अफगानिस्तान में ईरान में नेतृत्व की तर्ज पर यह व्यवस्था की जाएगी जहां सर्वोच्च नेता देश का सबसे बड़ा राजनीतिक और धार्मिक प्राधिकारी होता है। उसका पद राष्ट्रपति से ऊपर होता है और वह सेना, सरकार तथा न्याय व्यवस्था के प्रमुखों की नियुक्ति करता है। साथ ही देश के राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य मामलों में सर्वोच्च नेता का निर्णय ही अंतिम होता है।

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अफगानिस्तान का नया राष्ट्रपति मुल्ला बरादर को बनाया जायेगा और वह सर्वोच्च नेता अखुंदजादा के अधीन काम करेंगे। उल्लेखनीय है कि मुल्ला अखुंदजादा तालिबान के सबसे बड़े धार्मिक नेता हैं और पिछले 15 साल से बलूचिस्तान प्रांत के कचलाक क्षेत्र में स्थित एक मस्जिद में कार्यरत हैं। इसके अलावा तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला मोहम्मद याकूब और दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई को भी नई सरकार में बड़ी भूमिका दी गयी है। इसके अलावा अफगानिस्तान की नई सरकार के तहत, गवर्नर प्रांतों के प्रमुख होंगे और ‘जिला गवर्नर’ अपने जिले के प्रभारी होंगे। तलिबान ने पहले ही प्रांतों और जिलों के लिए गवर्नरों, पुलिस प्रमुखों और पुलिस कमांडरों की नियुक्ति कर दी है। माना जा रहा है कि नई सरकार में अफगानिस्तान के सभी कबीलों के सदस्यों और महिलाओं को शामिल किया जाएगा। हालांकि तालिबान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो कोई भी पिछले 20 साल में अफगानिस्तान में पूर्ववर्ती सरकारों में शामिल था उसे नए तालिबान प्रशासन में जगह नहीं मिलेगी। देखना होगा कि तालिबान की नई सरकार का आधिकारिक रूप से घोषित स्वरूप क्या होता है और क्या दुनिया इस छीनी गयी सत्ता को मान्यता देती है।

-नीरज कुमार दुबे

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