Prabhasakshi Exclusive: Myanmar के बिगड़ते हालात और Arakan Army की बढ़ती ताकत ने भारतीय सीमाओं के लिए क्या खतरा पैदा किया है?

By नीरज कुमार दुबे | Jan 02, 2025

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि म्यांमार में जुंटा के वेस्टर्न कमांड हेडक्वॉर्टर में विद्रोही सैन्य समूह का कब्जा हो गया है। इससे भारत के लिए क्या संभावित खतरे उत्पन्न हो गये हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि पश्चिमी म्यांमार में एक शक्तिशाली जातीय सशस्त्र समूह अराकान आर्मी ने रखाइन राज्य में जुंटा के पश्चिमी कमान मुख्यालय पर कब्जा करके महत्वपूर्ण सैन्य जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि पिछले अगस्त में पूर्वोत्तर कमान पर म्यांमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सेना के कब्जे के बाद, यह पांच महीनों में जातीय विद्रोहियों के कब्जे में आने वाली दूसरी क्षेत्रीय कमान है।

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ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि जहां तक भारतीय सीमाओं को अराकान आर्मी से खतरे की बात है तो हमारे सुरक्षा बल पूरी तरह मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी हर तरह के प्रयास विफल किये गये हैं और आगे भी किसी भी संभावित हमले या घुसपैठ को विफल करने के लिए हमारे सुरक्षा बल सतर्क हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर हमें बांग्लादेश के हालात को देखते हुए वहां से होने वाली घुसपैठ रोकनी है तो दूसरी ओर म्यांमार से होने वाली घुसपैठ रोकने की भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर हमारे कई गांव म्यांमार के एकदम निकट हैं इसलिए हमारे बल काफी सतर्कता बरत रहे हैं ताकि म्यांमार क्षेत्र में होने वाला आपसी संघर्ष कहीं हमें कोई नुकसान नहीं पहुँचाए।

ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत को सर्वाधिक खतरा चिन नेशनल आर्मी से है क्योंकि यह भारत विरोधी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई मिजो ग्रुप भी खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों का हाथ मणिपुर में अशांति पैदा करने में भी है इसलिए भारत सीमाओं पर हर हरकत पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हमारे लिये चुनौतियां कई हैं इसलिए पाकिस्तान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश सीमाओं पर कड़ी चौकसी बरती जा रही है।

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