By अभिनय आकाश | Nov 03, 2026
आजकल हर विपक्षी नेता और कई देशों का डीप स्टेट किसी भी कीमत पर पीएम मोदी को हटाना चाहता है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते तो क्या होगा? चीन ने जाने अनजाने में इस सवाल का जवाब दे दिया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस सवाल का जवाब एक अलग अंदाज में दिया है। हैरानी की बात देखिए कि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि 2014 के बाद भारत में क्या-क्या बदल गया। यानी अगर नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री नहीं बनते तो शायद बहुत कुछ नहीं होता। इसी कड़ी में ग्लोबल टाइम्स ने भारत और चीन में नई दवाओं और मेडिकल रिसर्च यानी क्लीनिकल ट्रायल्स में आई भारी तेजी के बारे में एक ग्राफ बनाया है। जब कोई नई दवाई वैक्सीन या इलाज बनाया जाता है तो इंसान पर उसकी सुरक्षा और असर को देखने के लिए परीक्षण किए जाते हैं। इन्हीं को क्लीनिकल ट्रायल्स कहा जाता है। ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि साल 1999 से लेकर 2025 के बीच भारत और चीन में नई रिसर्च और परीक्षणों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। साल 1999 में चीन ने सिर्फ 39 ट्रायल किए थे, जो 2025 में बढ़कर 24,524 हो गए हैं। तो वहीं 1999 में भारत ने सिर्फ नौ क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्टर करवाए थे, जो अब 2025 में बढ़कर 21,410 हो गए हैं। लेकिन असली खेल चीन ने इसके बाद किया।
2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था कैश पर आधारित थी। लेकिन आज भारत ने रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामले में दुनिया में नंबर वन पोजीशन हासिल कर ली है। दुनिया के 46 से ज्यादा डिजिटल लेनदेन अकेले भारत में होते हैं। अब आप इसरो की तरक्की देखिए। भारत ने 1990 के दशक से लेकर 2014 तक कुल 35 विदेशी सेटेलाइट ल्च किए थे। भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था और स्पेस सेक्टर में स्टार्टअप्स की संख्या सिर्फ एक थी। लेकिन 2014 के बाद भारत की रॉकेट क्षमता इतनी मजबूत हुई है कि अब तक इसरो ने 399 विदेशी सेटेलाइट लॉन्च कर दिए हैं। और अब तो भारत के स्पेस सेक्टर में 440 से भी ज्यादा प्राइवेट स्टार्टअप्स हैं। जाते-जाते आपको बता दें कि 2014 तक देश में लगभग 74 एयरपोर्ट थे, जो अब 150 के पार हैं। 2014 तक देश के ग्रामीण इलाकों में केवल 17% घरों तक पानी पहुंचता था जो अब 80% से ज्यादा हो गया है।